
पांच साल पहले पति का निधन, चार बच्चों संग जर्जर मकान में गुजर-बसर; पीएम आवास के लिए 2025 में किया आवेदन, आज तक नहीं मिला लाभ, गुरुवार सुबह आठ वर्षीय बेटे के सिर पर गिरते-गिरते बचीं छत की कड़ियां
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
कैराना। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला नगर के मोहल्ला आलकला से सामने आया है। गुरुवार सुबह जर्जर मकान की छत की तीन कड़ियां अचानक भरभराकर गिर गईं। उस समय आठ वर्षीय मासूम उमैर चारपाई पर सो रहा था। संयोग अच्छा रहा कि मलबा उसके ऊपर नहीं गिरा और उसकी जान बाल-बाल बच गई। हादसे के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ कब पहुंचेगा?
पीड़िता इरफना, पत्नी स्वर्गीय दिलशाद, ने बताया कि गुरुवार सुबह करीब छह बजे अचानक मकान की छत की तीन कड़ियां टूटकर नीचे गिर गईं। उस समय उनका आठ वर्षीय बेटा उमैर चारपाई पर गहरी नींद में सो रहा था। तेज धमाके की आवाज सुनकर परिवार और आसपास के लोग मौके पर दौड़े। राहत की बात यह रही कि मासूम को गंभीर चोट नहीं आई। परिवार के अन्य बच्चे उस समय स्कूल के लिए जा चुके थे। यदि सभी बच्चे घर में मौजूद होते तो बड़ा हादसा हो सकता था। इरफना ने बताया कि करीब पांच वर्ष पहले उनके पति दिलशाद का निधन हो गया था। पति की मौत के बाद वह अकेले अपने चार बच्चों रिहान (14), इकरा (11), समरी (10) और उमैर (8) का पालन-पोषण कर रही हैं। आर्थिक तंगी के चलते परिवार जर्जर मकान में रहने को मजबूर है, जहां हर पल हादसे का खतरा बना रहता है। सबसे गंभीर बात यह है कि इरफना ने 27 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें आज तक योजना का लाभ नहीं मिल सका।उनका आरोप है कि कई बार आवेदन करने के बावजूद उनका नाम सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि क्षेत्र में कई अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिल चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पात्र विधवा को आवास क्यों नहीं मिला?छत गिरने की घटना के बाद परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए, जर्जर मकान का सर्वे कराया जाए तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर आवास स्वीकृत किया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। अब बड़ा सवाल यह है कि जब एक विधवा महिला, जिसने नियमानुसार आवेदन भी किया, उसे आज तक पक्का आवास नहीं मिला, तो सरकारी योजनाओं की पात्रता और चयन प्रक्रिया आखिर किन मानकों पर संचालित हो रही है?



