युध निमार्णी में करोड़ों का घोटाला, बांटे फर्जी टेंडर
फिरोजाबाद । सीबीआई ने फिरोजाबाद की रक्षा मंत्रालय के अधीन आयुध वस्त्र निमार्णी में करीब 12 करोड़ रुपये के कथित टेंडर घोटाले का खुलासा करते हुए चार एफआईआर दर्ज की हैं। मामले में पूर्व मुख्य महाप्रबंधक समेत 10 लोगों पर फर्जी टेंडर, रिश्वत, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।
रक्षा मंत्रालय के अधीन फिरोजाबाद के हजरतपुर स्थित आयुध उपस्कर निमार्णी (ओईएफएच) में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सीबीआई जांच में खुला है। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा गाजियाबाद ने कारखाने के तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) अमित सिंह, कनिष्ठ कार्य प्रबंधकों (जेडब्ल्यूएम) और कई ठेकेदारों व छद्म (डमी) कंपनियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की 4 अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं। इनमें कुल 10 आरोपी बनाए गए हैं। एक प्राथमिकी में फिरोजाबाद के सबसे बड़े कांच-चूड़ी उद्यमी राजकुमार मित्तल को भी आरोपी बनाया गया है।
सीबीआई जांच में साफ हुआ है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच नियमों को ताक पर रखकर करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी टेंडर बांटे गए और कारखाने के भीतर के ही कंप्यूटरों का इस्तेमाल कर चहेती कंपनियों को टेंडर दिलाए गए। इसके एवज में अफसरों को लाखों की रिश्वत, दक्षिण कोरिया की हवाई यात्रा के टिकट और उनकी पत्नियों के खातों में मोटी रकम ट्रांसफर की गई।
पहली प्राथमिकी 5.67 करोड़ के छद्म कंपनी घोटाला से संबंधित है। बिना किसी तकनीकी योग्यता और फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर मैसर्स एमएसएम एंटरप्राइजेज को 5.67 करोड़ रुपये के कुल 50 टेंडर दे दिए गए। तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक अमित सिंह ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के नियमों का उल्लंघन कर टेंडर की शर्तें बदल दीं। ठेकेदार ने टेंडर डालने के लिए आयुध कारखाने के ही सरकारी कंप्यूटर तंत्र और इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) पते का इस्तेमाल किया।
दूसरी प्राथमिकी 5.26 करोड़ के घोटाले की है। यह ट्रॉली बैग घोटाला है। मैसर्स एम के इंडस्ट्रीज (जो बाद में एम के हाईटेक प्राइवेट लिमिटेड बनी) को कागजों पर दिखाकर 5.26 रुपये के 17 टेंडर दिए गए। सीबीआई जांच में पता चला कि जिस फरीदाबाद के पते पर कंपनी पंजीकृत थी, वहां कोई काम ही नहीं हो रहा था। बल्कि वहां संपत्ति विक्रेता का कार्यालय और बर्फखाना चल रहा था। तीसरी प्राथमिकी स्थानीय क्रय समिति (एलपीसी) के माध्यम से मैसर्स आयुष एंटरप्राइजेज और मैसर्स अर्बन वॉल को फर्जी मूल्य-उद्धरण (कोटेशन) के आधार पर 29 टेंडर देने की है।
ये दोनों कंपनियां एक ही व्यक्ति अजीत गौतम द्वारा अपनी पत्नी और बेटे के नाम पर संचालित की जा रही थीं। तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक अमित सिंह ने कनिष्ठ कार्य प्रबंधक दीपेश गुप्ता को बार-बार स्थानीय क्रय समिति का सदस्य बनाया ताकि इन कंपनियों को टेंडर मिल सके। चौथी प्राथमिकी फैक्टरी के प्रतिबंधित दायरे यानी सुरक्षा क्षेत्र में 30 लाख की रिश्वत लेकर अवैध निर्माण से संबंधित है। इसमें आरोप है कि फिरोजाबाद के कांच-चूड़ी कारोबारी राज कुमार मित्तल को कारखाने की दीवार से महज 20 फीट की दूरी पर 18 फीट ऊंची और 300 मीटर लंबी अवैध कंक्रीट की दीवार बनाने की छूट दे दी गई।



