
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली l सिंगरौली जिले के सरई रेलवे स्टेशन परिसर में संचालित कोल यार्ड एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। कोल यार्ड का वीडियो बना रहे पत्रकार ज्ञानेन्द्र प्रजापति से कथित तौर पर कंपनी के 5–7 कर्मचारियों ने घेरकर मोबाइल से वीडियो डिलीट करा दिया। घटना की जानकारी मिलते ही युवा समाज सेवा संगठन के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराई। बताया जाता है कि बातचीत के दौरान संबंधित कर्मचारियों ने अपने व्यवहार पर खेद व्यक्त करते हुए पत्रकार से माफी मांगी और भविष्य में किसी भी व्यक्ति को वीडियो बनाने से नहीं रोकने का आश्वासन दिया। इसके बाद मामला शांत हो गया, लेकिन इस घटना ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रेलवे स्टेशन परिसर में संचालित कोल यार्ड पूरी तरह वैध है और सभी आवश्यक विभागीय अनुमतियां प्राप्त हैं, तो फिर वीडियो बनाने का विरोध क्यों किया गया? आखिर ऐसी क्या वजह थी कि पत्रकार से वीडियो डिलीट कराने की नौबत आ गई?
घटना के बाद क्षेत्र में कोल यार्ड के संचालन और उसकी वैधानिक स्वीकृतियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों का मानना है कि यदि सभी नियमों का पालन किया जा रहा है, तो पारदर्शिता बनाए रखने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए। वहीं, यदि अनुमति या नियमों को लेकर कोई विसंगति है, तो संबंधित विभागों को निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
IFWJ के जिला अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कहा कि
फिलहाल यह मामला केवल पत्रकार से वीडियो डिलीट कराने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रेलवे स्टेशन परिसर में संचालित कोल यार्ड की वैधता, स्वीकृतियों और संचालन प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिला अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों को सार्वजनिक करने तथा यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।




