गाजियाबाद
राजनीति में सक्रियता, विकास में सुस्ती
बारिश ने खोली डीएलएफ अंकुर विहार की बदहाल सड़कों की पोल, स्कूली बच्चों से भरा ई-रिक्शा पलटा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : रुक-रुक कर हो रही बारिश ने लोनी क्षेत्र की बदहाल सड़कों और जल निकासी व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर उजागर कर दी है। आधा दर्जन से अधिक कॉलोनियों में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त है, जबकि वार्ड-33 के रेल विहार और डीएलएफ अंकुर विहार में हालात सबसे अधिक खराब बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है।
बारिश के बाद डीएलएफ अंकुर विहार के डी-ब्लॉक स्थित एटीएम वाली सड़क पूरी तरह गड्ढों और जलभराव की चपेट में आ गई। गुरुवार सुबह इसी जर्जर सड़क पर स्कूली बच्चों से भरा एक ई-रिक्शा पलट गया। हादसे में चार से पांच बच्चे घायल हो गए, जिनमें से दो बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और अभिभावकों में भी आक्रोश देखा गया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस सड़क के निर्माण की मांग जनप्रतिनिधियों से लंबे समय से की जा रही है, लेकिन आज तक कार्य शुरू नहीं हो सका। लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय यहां विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। उनका कहना है कि फेसबुक और व्हाट्सएप पर विकास के दावों की भरमार रहती है, मगर वास्तविक स्थिति देखने पर विकास कहीं नजर नहीं आता।
रेल विहार, अंकुर विहार, डी-ब्लॉक सहित आसपास की कई गलियों में बारिश का पानी भर जाने से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। सड़कों पर जलभराव, टूटी सड़कें और खुले गड्ढे लगातार दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं, जबकि पैदल चलने वाले लोगों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
नागरिकों का आरोप है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होने और जल निकासी की समुचित व्यवस्था के अभाव में हर बारिश के बाद यही स्थिति बन जाती है। कई स्थानों पर सीवर का पानी भी सड़कों पर फैल रहा है, जिससे दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों और नगर पालिका परिषद से मांग की है कि डीएलएफ अंकुर विहार की जर्जर सड़कों का तत्काल निर्माण कराया जाए, जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और दुर्घटना संभावित मार्गों की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर कराई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बरसात के मौसम में ऐसे हादसे दोबारा हो सकते हैं और आम नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
