पटवारी पर पैसे लेकर शिक्षक को पटवारी सहायक बनाने का आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली l जिले के सरई तहसील अंतर्गत मटिया गांव में पटवारी सहायक (लोकल यूथ) के चयन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों और स्थानीय आवेदकों ने क्षेत्र में पदस्थ पटवारी शिवांनश दाहिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कथित लेन-देन के आधार पर गन्नई पीएम श्री विद्यालय में पदस्थ एक कार्यरत शिक्षक का पटवारी सहायक के रूप में चयन किया गया है। मामले के सामने आने के बाद गांव के बेरोजगार युवाओं और ग्रामीणों में नाराजगी है।
पात्र बेरोजगार युवाओं की अनदेखी का आरोप।
ग्रामीणों के मुताबिक पटवारी सहायक के लिए गांव के कई शिक्षित एवं बेरोजगार युवाओं ने आवेदन किया था। आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान आवेदकों की पात्रता, स्थानीयता और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले से शासकीय विद्यालय में कार्यरत शिक्षक को पटवारी सहायक की जिम्मेदारी दिए जाने से चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। वहीं, कथित आर्थिक लेन-देन के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है।
एक स्थानीय ग्रामीण ने कहा, “गांव में कई पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा इस काम के लिए पात्र थे। इसके बावजूद पहले से कार्यरत शिक्षक का चयन किया गया। प्रशासन को पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।”
नियम और चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पटवारी सहायक के चयन में लागू नियमों, पात्रता, स्थानीयता, आवेदन प्रक्रिया और चयन के आधार की जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
तहसीलदार का पक्ष नहीं मिल सका।
मामले में सरई तहसीलदार का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। इसलिए उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।
वहीं, पटवारी शिवांनश दाहिया से फोन पर इस संबंध में बात की गई। आरोपों और कार्यरत शिक्षक के चयन को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “शिक्षक हैं। तो क्या होगा, वही रहेंगे। जो करना है कर लो।” पटवारी के इस कथित जवाब को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी बताई जा रही है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग, आंदोलन की चेतावनी।
ग्रामीणों और प्रभावित आवेदकों ने सिंगरौली जिला प्रशासन एवं कलेक्टर से मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि चयन प्रक्रिया से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच की जाए और चयन में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार प्रमाणित होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि मामले में जल्द जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।



