मुंबई में रोजी-रोटी कमाने आए गरीब चालको पर भाषा के नाम पर उत्पीड़न बंद हो: धर्मेन्द्र महतो।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बोकारो। मुंबई में उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से आकर अपनी आजीविका चलाने वाले गरीब ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के अधिकारों को लेकर आवाज उठने लगी है। विष्णुगढ़ की आवाज’ समूह के एडमिन और मुंबई में कार्यरत्त कार ड्राइवर कुमार धर्मेन्द्र महतो ने भाषा के नाम पर गरीब चालको के साथ हो रहे कथित भेदभाव और उत्पीड़न पर कड़ा ऐतराज जताया है।
साथ ही कहा कि “एक देश में दो नियम नहीं चल सकते।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे महाराष्ट्र की स्थानीय संस्कृति और मराठी भाषा का पूरी तरह सम्मान करते हैं, लेकिन भाषा सीखने के नाम पर इसे केवल गरीब ऑटो और टैक्सी चालकों पर जबरन थोपना अनुचित है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नियम लागू करना ही है, तो इसे केवल सड़क पर पसीना बहाने वाले चालकों तक सीमित क्यों रखा गया है? यदि भाषा की अनिवार्यता का नियम बनाना ही है, तो इसे बड़े कॉर्पोरेट कार्यालयों, निजी कंपनियों और उच्च अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि केवल गरीब और मेहनतकश वर्ग को निशाना बनाया गया और उन पर दबाव बनाया गया, तो इसके खिलाफ पुरजोर विरोध दर्ज कराया जाएगा। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि नियमों के नाम पर गरीब चालकों का उत्पीड़न रोका जाए और सभी नागरिकों के साथ समानता का व्यवहार किया जाए।



