असम
असम पुलिस ने बिर लाछित सेना के नेता मानसज्योति चेतिया की मौत की जांच के लिए किया एचआईटी गठित।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
असम : सिवसागर पुलिस ने बिर लाछित सेना के नेता मानसज्योति चेतिया की मौत मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एचआईटी) गठित की है। एचआईटी का नेतृत्व सिवसागर के उप-अधीक्षक पुलिस (डीएचपी) लीला बोरा कर रही हैं। टीम में आमगुरी थानाध्यक्ष मृदुल हज़ारिका, नाज़ीरा थाने के द्वितीय अधिकारी एचआई(इउबी) सिराज सैकिया और नाज़ीरा थाने की WSI (इउबी) सुमी बर्मन शामिल हैं। इस मामले में अनुसंधान अधिकारी के रूप में एचआई सिराज सैकिया को नियुक्त किया गया है। पुलिस ने अभी तक शिकायत में नामित पांच लोगों को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की पहचान अबीदुर रहमान, सुबेदा बेगम, सेलीमुर रहमान, सेलीमा बेगम और अनोयारा बेगम के रूप में हुई है। शिकायत के अनुसार मुख्य आरोपी मुजामिल इस्लाम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। घटना की पृष्ठभूमि के मुताबिक, मानसज्योति चेतिया को 23 अगस्त की रात प्रजाबस्ती के पास रोडसाइड पर बेहोश हालत में पाया गया था। बताया गया कि उन्हें सड़क हादसे में गंभीर चोटें आई थीं। उन्हें उपचार के लिए तुरंत डिब्रूगढ़ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमचीएइस) ले जाया गया, जहां 25 अगस्त को उनकी मृत्यु हो गई। एचआईटी अब मामले में दायर बिर लछित सेना की शिकायत में उठाए गए आरोपों की विस्तृत जांच करेगी और देखेगी कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनका इस मामले में कोई भूमिका है या नहीं। टीम उपलब्ध साक्ष्य जुटाएगी, गवाहों और संदिग्धों के बयान दर्ज करेगी और घटना के क्रम को पुनर्निर्मित कर सही तथ्य उजागर करने का प्रयास करेगी। जांच के दौरान यह भी आंका जाएगा कि उपलब्ध साक्ष्य शिकायत में उठाए आरोपों का समर्थन करते हैं और क्या घटना से कोई आपराधिक देयता जुड़ती है। बीर लाछित सेना के प्रमुख श्रंखल चलिहा ने हिरासत में लिए जाने का स्वागत किया और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, मंत्री बिमल बोरा और सिवसागर पुलिस अधिकारी पापोरी चेतिया का आभार जताया। चलिहा ने दावा किया कि मुख्य आरोपी मुजामिल इस्लाम के बारे में कई लोगों ने उसे ‘जिहादी स्लीपर सेल’ से जोड़कर पहचाना है और यदि ऐसे कड़ी साज़िशी नेटवर्क में उसकी संलिप्तता साबित होती है तो प्रतिक्रिया कड़ी होनी चाहिए। हालांकि, पुलिस की तरफ से अब तक मुजामिल इस्लाम के आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े होने का कोई पुष्ट प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है। एचआईटी की निष्कर्ष रिपोर्ट और जांच में मिले साक्ष्य ही आगे की कार्रवाई तथा संभव आपराधिक आरोप तय करेंगे। सिवसागर पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग देने का भी अनुरोध किया है।



