
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक के मामलों पर सुनवाई करते हुए खुदरा दुकानों में तेजाब की बिक्री को बेहद सीमित करने या पूरी तरह प्रतिबंधित करने की संभावना पर विचार किया। पीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा।
तेजाब हमलों से जुड़े एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने खुदरा दुकानों में एसिड की बिक्री को बेहद सीमित करने, यहां तक कि पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार किया। अदालत ने संबंधित प्राधिकरणों से इस मामले में जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि तेजाब हमले के पीड़ितों को पारंपरिक उपचार पद्धतियों से बचाने और इस संबंध में जागरूकता फैलाने में गैर-सरकारी संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि सरकार की मौजूदा गाइडलाइंस पुरानी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर बार कदम उठाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। याचिकाकर्ता ने बताया कि वह 17 साल पहले तेजाब हमले का शिकार हुए थे और आज भी नींद के लिए दवा लेते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे हमले का मानसिक और शारीरिक असर बेहद गंभीर होता है और इससे किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी बर्बाद हो सकती है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि वह तीन अन्य पीड़ितों को जानते हैं, जिनमें एक 14 वर्षीय बच्चा भी शामिल है। याचिकाकर्ता ने कहा कि पीड़ितों के लिए सुप्रीम कोर्ट ही आखिरी उम्मीद है।
जागरूकता बढ़ाने में क्या भूमिका होगी?
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि एसिड अटैक पीड़ितों के इलाज को लेकर जागरूकता बढ़ाने में गैर-सरकारी संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। खास तौर पर पारंपरिक उपचार के तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों के बारे में लोगों को जागरूक करना जरूरी बताया गया।



