युवाओं की बदलती जीवनशैली और प्रकृति से बढ़ती दूरी पर पर्यावरण एक्टिविस्ट बबलू कुमार महतो ने जताई गहरी चिंता |

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बोकारो। बदलती जीवनशैली और तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच युवाओं का प्रकृति से जुड़ाव लगातार कम होता जा रहा है, जो आने वाले भविष्य के लिए एक बेहद गंभीर संकेत है। इस बदलती स्थिति पर पर्यावरण एक्टिविस्ट बबलू कुमार महतो ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने युवाओं और आम लोगों से पर्यावरण, प्रकृति और भविष्य से जुड़े विषयों पर गंभीर होने की अपील की है।बबलू कुमार महतो ने चिंता जताते हुए कहा, “आज का युवा शिक्षा, रोजगार और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां तो हासिल कर रहा है, लेकिन उसके दैनिक जीवन में प्रकृति के लिए समय और जुड़ाव लगातार कम होता दिखाई दे रहा है। तकनीक और स्क्रीन की दुनिया में खोया युवा वर्ग अपने आस-पास के पर्यावरण से कट रहा है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि पर्यावरण को केवल किसी विशेष दिवस, पौधारोपण कार्यक्रमों या भाषणों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे समाज की रोजमर्रा की सोच का हिस्सा बनाया जाए।”उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि स्थानीय स्तर पर प्रकृति से जुड़े संकटों को समझने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए युवाओं को आगे आना होगा। युवाओं को उनकी पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति जागरूक होना ही होगा।बबलू कुमार महतो ने आगे कहा कि प्राकृतिक संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति, संस्था या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। आज का युवा अपनी ऊर्जा, आधुनिक तकनीक और नई सोच के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को एक जनभागीदारी का विषय बना सकता है। देश की प्रगति और प्रकृति का संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। अगर आज के युवाओं की सोच बदलेगी, तो आने वाले भारत की दिशा और पर्यावरण की स्थिति भी बदलेगी।



