बागपत
आंखों की रोशनी सिर्फ नजर नहीं, जिंदगी की खूबसूरती है—डॉ. वत्सला निधि
समय रहते आंखों की जांच और सही देखभाल से बचाई जा सकती है आंखों की सेहत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। आंखें इंसान के शरीर का वह अनमोल हिस्सा हैं, जिनके जरिए हम दुनिया को देखते, समझते और महसूस करते हैं। लेकिन बदलती जीवनशैली, मोबाइल और कंप्यूटर का बढ़ता इस्तेमाल, प्रदूषण, धूल-मिट्टी और अनियमित दिनचर्या के कारण आंखों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में आंखों की बीमारी का इलाज कराने के साथ-साथ समय रहते उसकी पहचान और बचाव भी बेहद जरूरी है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वत्सला निधि का कहना है कि आंखों को स्वस्थ रखने के लिए किसी समस्या के गंभीर होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। आंखों में बार-बार जलन, लालिमा, पानी आना, खुजली, दर्द, सिरदर्द अथवा धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण शरीर की ओर से मिलने वाला संकेत हो सकते हैं।
मोबाइल और स्क्रीन ने बढ़ाई चुनौती
आज बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग मोबाइल, टीवी, लैपटॉप और अन्य डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल कर रहे हैं। लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, सूखापन और जलन जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।
डॉ. वत्सला निधि लोगों को सलाह देती हैं कि स्क्रीन का इस्तेमाल करते समय बीच-बीच में आंखों को आराम दें और पर्याप्त रोशनी में ही मोबाइल या कंप्यूटर का उपयोग करें। बच्चों के मामले में अभिभावकों को विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि वे लगातार लंबे समय तक स्क्रीन के सामने न रहें।
धूल और प्रदूषण से भी आंखों को खतरा
गर्मी और धूल भरे मौसम में आंखों की सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। धूल के कण आंखों में जाने पर लोग अक्सर उन्हें हाथ से रगड़ने लगते हैं। डॉ. वत्सला निधि के अनुसार आंखों को रगड़ना समस्या को बढ़ा सकता है।
यदि आंख में धूल या कोई कण चला जाए तो साफ पानी से आंखों को धोना राहत दे सकता है। समस्या बनी रहने पर विशेषज्ञ से जांच कराना उचित है।
बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान जरूरी
बच्चों में आंखों से जुड़ी समस्या कई बार उनकी पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। बच्चा किताब या मोबाइल बहुत पास से देखने लगे, बार-बार आंखें मले, सिरदर्द की शिकायत करे या दूर की चीजें देखने में परेशानी महसूस करे तो अभिभावकों को इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
वहीं उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों में आंखों की संवेदनशीलता बढ़ सकती है। इसलिए नियमित नेत्र जांच उनके लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
आंखों की देखभाल में लापरवाही न बरतें
डॉ. वत्सला निधि का कहना है कि आंखों से जुड़ी समस्या में अपने स्तर पर कोई भी आई ड्रॉप या दवा शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। लगातार जलन, दर्द, लालिमा, पानी आना अथवा धुंधला दिखाई देने जैसी समस्या को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
उनका संदेश स्पष्ट है—आंखों की देखभाल किसी एक मौसम की जरूरत नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी की जिम्मेदारी है। समय पर जांच, स्वच्छता, संतुलित जीवनशैली और विशेषज्ञ की सलाह अपनाकर आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।
डॉ. वत्सला निधि का संदेश
“आंखों की छोटी-सी परेशानी को भी नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही सलाह कई बड़ी समस्याओं से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।”



