बेतुल

बैतूल एक ही नाम पर तीन सरकारी पट्टे, 25-30 एकड़ जमीन के दावे ने बढ़ाए सवाल

प्लॉट नंबर 40, 41 और 45 के पट्टों की जांच की मांग, पात्रता से लेकर मौके के सत्यापन तक उठे सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
बैतूल आमला। ग्राम लिंखड़ी में शासकीय आवासीय पट्टों के वितरण को लेकर शिकायत सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। खसरा नंबर 214 (बी) में प्लॉट नंबर 40, 41 और 45 के तीन अलग-अलग आवासीय पट्टे एक ही व्यक्ति के नाम जारी किए जाने के दावे ने राजस्व विभाग की पट्टा प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। शिकायतकर्ता ने एसडीएम आमला को आवेदन देकर तीनों पट्टों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार प्लॉट नंबर 40 पर 111 वर्गमीटर, प्लॉट नंबर 41 पर 22 वर्गमीटर तथा प्लॉट नंबर 45 पर 69 वर्गमीटर भूमि के आवासीय पट्टे जारी किए गए हैं। शिकायतकर्ता सत्येंद्र सिंह ने इन पट्टों की पात्रता, भूमि स्वामित्व और मौके के सत्यापन की जांच की मांग की है।
25-30 एकड़ निजी जमीन होने का दावा
मामले में रामसिंह सिकरवार ने आरोप लगाया है कि तीनों पट्टे सीताराम सिंह गज्जू पटेल के नाम बताए जा रहे हैं। उनका दावा है कि संबंधित व्यक्ति के पास करीब 25 से 30 एकड़ निजी जमीन है। हालांकि इस दावे की पुष्टि राजस्व रिकॉर्ड से होना बाकी है।
यदि राजस्व अभिलेखों में संबंधित व्यक्ति के नाम इतनी निजी भूमि दर्ज पाई जाती है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु होगा कि शासकीय आवासीय पट्टे के लिए पात्रता किन आधारों पर निर्धारित की गई। प्रशासन द्वारा भूमि स्वामित्व, परिवार की स्थिति और शासन के निर्धारित पात्रता मापदंडों का परीक्षण किया जाना आवश्यक है।
तीन पट्टों के साथ सत्यापन प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
एक ही खसरा नंबर में तीन प्लॉटों के पट्टे जारी किए जाने के दावे के बाद अब यह भी सवाल उठ रहा है कि प्रत्येक प्रकरण में पात्रता का सत्यापन किस स्तर पर किया गया। क्या अलग-अलग आवेदन लिए गए थे? क्या आवेदक और उसके परिवार के भूमि स्वामित्व की जांच की गई? क्या स्थल निरीक्षण और मौके का पंचनामा तैयार किया गया? इन बिंदुओं की जांच से ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायत में सार्वजनिक आवागमन से जुड़े पहलू की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। यदि पट्टे वाली भूमि से होकर सार्वजनिक रास्ता गुजरता है या पट्टों के कारण रास्ता प्रभावित हो रहा है, तो इस तथ्य का भी मौके पर भौतिक सत्यापन किया जाना जरूरी है।
पात्र हितग्राहियों के अधिकार से जुड़ा सवाल
शासकीय आवासीय पट्टों की व्यवस्था का उद्देश्य पात्र और जरूरतमंद परिवारों को आवास के लिए भूमि उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि जांच में किसी अपात्र व्यक्ति को नियमों के विपरीत पट्टा दिए जाने की पुष्टि होती है, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया की गंभीरता से जांच का विषय होगा। वहीं यदि संबंधित व्यक्ति निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र पाया जाता है, तो राजस्व विभाग को रिकॉर्ड के आधार पर उसकी पात्रता स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि शिकायतों और लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button