फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर 7.47 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप
कंपनी के आठ ऋणधारकों के पतियों के जाली प्रमाण पत्र बनाकर बीमा राशि हड़पने का आरोप, दो पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
झिंझाना। भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन लिमिटेड के दो पूर्व कर्मचारियों पर कंपनी के ऋणधारकों से धोखाधड़ी कर करीब 7.47 लाख रुपये की बीमा राशि हड़पने का आरोप लगा है। आरोप है कि कर्मचारियों ने ऋण माफ कराने का झांसा देकर दस्तावेज हासिल किए और आठ ऋणधारकों के पतियों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर कंपनी के पोर्टल पर अपलोड कर दिए। बीमा राशि स्वीकृत होने के बाद बायोमेट्रिक और ओटीपी के माध्यम से रकम निकाल ली गई।कंपनी के झिंझाना स्थित बाजारिया ब्रांच के तत्कालीन प्रबंधक एवं वर्तमान में करनाल ब्रांच में तैनात विकास कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि कंपनी इंडसइंड बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। तहरीर के अनुसार, सुनील निवासी बाल जाटन, पानीपत, कंपनी में फील्ड स्टाफ के रूप में कार्य करता था, जबकि दीपक कुमार निवासी कारखाना, सफीदो, जींद, कैशियर के पद पर कार्यरत था।आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने कंपनी के कुछ गांवों में चल रहे महिला समूहों के ऋण खातों को बंद कराने का झांसा दिया। उन्होंने ऋणधारकों से कहा कि कंपनी में योजना चल रही है, जिसके तहत उनका पुराना ऋण माफ हो जाएगा। इसके लिए आधार कार्ड, वोटर कार्ड और पति का आधार कार्ड मांगा गया। दस्तावेज मिलने के बाद दोनों ने कथित रूप से मिलीभगत कर आठ ऋणधारकों के पतियों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए। तहरीर में आरोप है कि फर्जी प्रमाण पत्र कंपनी के पोर्टल पर अपलोड कर बीमा राशि स्वीकृत कराई गई। इसके बाद ऋणधारकों को अधिक ऋण स्वीकृत कराने का लालच देकर उनका बायोमेट्रिक लगवाया गया और ओटीपी प्राप्त कर बीमा की रकम निकाल ली गई। ऋणधारकों को इसकी जानकारी नहीं दी गई।
> कंपनी के आडिट और सत्यापन के दौरान ऋणधारकों से पूछताछ में मामले का खुलासा हुआ। कंपनी की जांच में दोनों कर्मचारियों पर कुल 7,47,202 रुपये के गबन का आरोप लगाया गया है। तहरीर के साथ कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट, ऋणधारकों के बयान और एक फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी संलग्न किया गया है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।


