साहेबगंज
पर्यावरण और जैव विविधता प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व जरूरी,डॉ रंजीत कुमार सिंह

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
साहिबगंज पर्यावरण सिर्फ पेड़-पौधे,नदी-पहाड़ नहीं,बल्कि वह पूरी व्यवस्था है जिसमें मानव सहित सभी जीव जंतु जीते हैं।इसी व्यवस्था में जीवों,वनस्पतियों और पारिस्थितिकी तंत्र की विविधता को जैव विविधता कहते हैं।जैव विविधता ही धरती पर जीवन के संतुलन की आधारशिला है।पेड़-पौधे ऑक्सीजन,भोजन और औषधि देते हैं तो पक्षी,कीट और सूक्ष्मजीव परागण,बीज प्रसार और मिट्टी को पोषक बनाने में मदद करते हैं,एक भी प्रजाति का नष्ट होना पूरे तंत्र को बिगाड़ सकता है।आज शहरीकरण, वन कटान,प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैव विविधता के लिए बड़ी चुनौती हैं,इसका असर सिर्फ वन्यजीवों पर नहीं, बल्कि कृषि,जल और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।साहिबगंज पहाड़,जंगल और नदियों के कारण जैव विविधता में समृद्ध है,इसका संरक्षण सिर्फ सरकार की नहीं, समाज और हर नागरिक की जिम्मेदारी है।संरक्षण का मतलब सिर्फ पौधा लगाना नहीं,उसकी देखभाल,जलस्रोतों की रक्षा,प्लास्टिक कम करना और जागरूकता फैलाना भी है,विकास और पर्यावरण में टकराव नहीं,तालमेल जरूरी है,
प्रकृति बचेगी तो जीवन बचेगा।



