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बैतूल पैराकैनो खिलाड़ी प्राची के पास नहीं थे नाव खरीदने के पैसे

बांस- तेल के ड्रम के जुगाड़ से पाया मुकाम अर्जुन पुरस्कार प्राप्त पैराएथलीट प्राची यादव को मणिकर्णिका सम्मान से नवाजेगा बैतूल  नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बैतूल। ग्वालियर निवासी प्राची यादव एक प्रसिद्ध भारतीय पैराकेनो एथलीट हैं। वह अंतरराष्ट्रीय कयाकिंग और कैनोइंग स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली और पैरालिंपिक विश्व कप में पदक (कांस्य) जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी हैं। खेल जगत में प्राची के उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार (2023) से भी सम्मानित किया जा चुका है। देश की यह प्रतिभा स्व. नेहा श्रीवास्तव की स्मृति में साझा प्रयासों से बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा आयोजित मणिकर्णिका सम्मान को प्राप्त करने आ रही है। 27 सितम्बर को वे अपने परिवार के साथ बैतूल में होंगी। प्राची यादव का जन्म रीढ़ की हड्डी में उभार के साथ हुआ था। उन्हें स्पाइना बिफिडा है, जिसके कारण उनके शरीर का निचला हिस्सा ठीक से काम नहीं करता है। लेकिन, विकलांगता उनके साहस को कभी कम नहीं कर पाई। प्राची ने 2020 टोक्यो पैरालिंपिक और 2024 पेरिस पैरालिंपिक दोनों में हिस्सा लिया और दोनों ही बार महिलाओं की वीएलडब्ल्यू 200 मीटर स्पर्धा के फाइनल में पहुंचकर 8वां स्थान हासिल किया। पोलैंड के पोजऩान में आयोजित 2022 आईसीएफ पैराकेनो विश्व कप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने देश के लिए पहला पैराकेनो विश्व पदक हासिल किया। एशियाई पैरा गेम्स 2023 चीन के हांगझू में हुए एशियाई पैरा गेम्स में उन्होंने केएलडब्ल्यू श्रेणी में स्वर्ण पदक और वीएलडब्ल्यू श्रेणी में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। 2026 में एशियन पैराकेनो चैंपियनशिप 2026 में प्राची ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2 स्वर्ण और 2 कांस्य पदक अपने नाम किए।
जुगाड़ की नाव से तीन साल की प्रैक्टिस, टोक्यो पैरालंपिक में बनाई जगह
प्राची ने अपने खेल जीवन की शुरुआत एक पैरा-तैराक के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर की थी। बाद में साल 2018 में उनके कोच मयंक ठाकुर की सलाह पर उन्होंने पैराकेनोइंग चुनी। शुरुआती दिनों में आधुनिक उपकरणों की कमी के कारण उनके कोच ने एक सामान्य नाव में तेल का ड्रम और बांस बांधकर संतुलन बनाने वाली जुगाड़ की नाव तैयार की थी, जिस पर अभ्यास करके प्राची पैरालिंपिक स्तर तक पहुंचीं। गौरतलब है कि पैरा-कैनोइंग खेल नया था और उस समय देश में पैरा-एथलीटों के लिए विशेष नावें उपलब्ध नहीं थीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक नाव की कीमत करीब 4 से 5 लाख रुपए थी। ऐसे में कोच मयंक ठाकुर ने एक सामान्य कैनो नाव के एक तरफ बांस के डंडों की मदद से एक ऑयल ड्रम (तेल का डिब्बा/कैन) बांध दिया था। यह ड्रम पानी में नाव का संतुलन बनाए रखने के लिए लगाया गया था, ताकि प्राची आसानी से अभ्यास कर सकें। इस जुगाड़ वाली नाव को बनाने में मात्र 25,000 से 80,000 रुपये के बीच का खर्च आया था। प्राची ने इसी जुगाड़ वाली नाव पर लगभग 3 साल तक कड़ा अभ्यास किया और टोक्यो पैरालंपिक के लिए अपनी जगह पक्की की। बाद में सफलता मिलने और स्पॉन्सर मिलने पर उन्हें विदेशी आधुनिक नावें मिल गईं।
देश के लिए 2028 के पैरालिंपिक में जीतना चाहती है पहला पैराकैनो मेडल
प्राची वर्तमान में भोपाल की लोअर लेक वाटर स्पोर्ट्स सेंटर में अभ्यास करती हैं। उन्हें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा विक्रम पुरस्कार (2020) और राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति द्वारा अर्जुन पुरस्कार (2023) से नवाजा गया है। भोपाल में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर और सीमा शुल्क विभाग में कार्यरत हैं। उनके पति मनीष कौरव भी एक अंतरराष्ट्रीय पैरा कयाक खिलाड़ी हैं जो उनके सबसे बड़े सपोर्टर माने जाते हैं। प्राची यादव अब लॉस एंजिल्स 2028 पैरालिंपिक खेलों में भारत के लिए पहला पैराकेनो मेडल जीतने के लक्ष्य के साथ तैयारी कर रही हैं।
अपने पिता के बैतूल आएंगी अंतराष्ट्रीय कराते खिलाड़ी रूषा ताम्बत
भारत की एक बेहद प्रतिभाशाली और उभरती हुई कराते खिलाड़ी रुषा ताम्बत अपने पिता के साथ मणिकर्णिका सम्मान समारोह में शामिल हो रही है।  रुषा भोपाल की रहने वाली हैं और मध्य प्रदेश कराते अकादमी की खिलाड़ी हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कराते में भारत और मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है। रूषा ताम्बत ने वर्ष 2023 में कराते की विश्व रैंकिंग में 33वें स्थान बनाया। एशियन कराटे चैंपियनशिप 2026 में  चीन के शाओगुआन में आयोजित 23वीं एशियन कैडेट, जूनियर और 21 कराते चैंपियनशिप के -21 महिला -55 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता है। साउथ एशियन कराटे चैंपियनशिप 2022 श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने देश के लिए कांस्य पदक हासिल किया था। उन्होंने नेशनल लेवल और अखिल भारतीय अंतर-क्षेत्रीय कराते चैंपियनशिप में भी शानदार प्रदर्शन (कैडेट कुमाइट +54 किग्रा वर्ग) किया है। चीन में आयोजित एशियन कराटे चैंपियनशिप 2025 में सिल्वर मेडल विजेता (एशियन कराटे में सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय, जॉर्डन में आयोजित एशियन कराटे चैंपियनशिप 2026 में ब्रॉन्ज़ मेडल विजेता, बर्मिंघम, इंग्लैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ कराटे चैंपियनशिप 2022 में ब्रॉन्ज़ मेडल विजेता, श्रीलंका और नेपाल में आयोजित साउथ एशियन कराटे चैंपियनशिप में 3 बार मेडल विजेता, नेशनल कराते चैंपियनशिप में 4 बार मेडल विजेता, एसजीएफआई नेशनल कराते गेम्स में 4 बार मेडल विजेता, असम में आयोजित ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी गेम्स 2026 में गोल्ड और सिल्वर मेडल विजेता रूषा का मुख्य लक्ष्य भविष्य में ओलंपिक जैसे बड़े वैश्विक मंचों पर भारत के लिए पदक जीतना है।
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