मथुरा

वृंदावन में संस्कृत पढ़ने 200 संस्थानों में 12 हजार विदेशी छात्र आये स्टूडेंट्स

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

मथुरा। तीन दशक के बाद धर्मनगरी में एक बार फिर संस्कृत के पठन-पाठन ने जोर पकड़ा है। इस समय छोटे-बड़े 200 संस्थान में 12 हजार विद्यार्थियों ने संस्कृत पढ़ने के लिए प्रवेश लिया है। इससे पहले, वृंदावन में संस्कृत पढ़ने की इच्छा लेकर आने वाले लोगों का उद्देश्य कर्मकांड, शादी-विवाह और याज्ञिक काम करना होता था। वृंदावन वैदिक शिक्षा, संस्कृत व्याकरण, भागवत व कर्मकांड की शिक्षा का केंद्र रहा है। गुरुकुल शिक्षा परंपरा की शुरुआत 1965 में पुराणाचार्य श्रीनाथ शास्त्री ने वैदिक विद्यालय की स्थापना करके की और इसके बाद इस्कॉन संस्थापक श्रील प्रभुपाद ने 1976 में भक्तिवेदांत गुरुकुल की स्थापना की। भक्तिवेदांत गुरुकुल के सहारे विदेशी भक्तों ने भी अपने बच्चों को वैदिक ज्ञान के लिए दाखिला दिलवाया। 2001 के आसपास जीवा इंस्टीट्यूट की शुरुआत हुई। तीन दशक पहले तक वृंदावन में पांच संस्कृत विद्यालय और तीन महाविद्यालय संचालित थे। जिले में संस्कृत के 40 विद्यालय थे। फिर, संस्कृत विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या गिरने लगी। सरकार ने भी ध्यान नहीं दिया। संस्कृत विद्यालयों में आचार्य नहीं रहे। छात्र कम हो गए। एक दशक पहले भागवत कथाकारों की धूम मची तो संस्कृत को लेकर रुझान लौटा। संस्कृत के नए निजी विद्यालय खुले। अनिरुद्धाचार्य, आचार्य धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री, देवकीनंदन ठाकुर, देवी चित्रलेखा से प्रभावित छात्र भागवताचार्य बनने की इच्छा लेकर पढ़ने आने लगे। आज अकेले वृंदावन में ही छोटे-बड़े 200 विद्यालयों में 12 हजार छात्र संस्कृत पढ़ रहे हैं। इन विद्यालयों में वेद विद्यालय, गुरुकुल शामिल हैं। आवासीय सुविधा भी दी जा रही है। इनमें नेपाल, रसिया और देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button