बेतुल
बैतूल संवेदनशीलता की मिसाल
शिक्षिका ज्योति यादव की पहल पर गंभीर बीमारी से जूझ रही छात्रा को मिला नया जीवन

खोखरा रैय्यत स्कूल की शिक्षिका ने आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार को दी हिम्मत; आयुष्मान योजना से हुआ सफल ऑपरेशन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। शिक्षा केवल किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं होती, बल्कि संवेदनशीलता और इंसानियत की राह दिखाकर किसी जरूरतमंद का जीवन संवारने का नाम भी शिक्षा है। बैतूल जिले के शाहपुर ब्लॉक अंतर्गत ईपीईएस शाला खोखरा रैय्यत में पदस्थ शिक्षिका ज्योति यादव ने इसे अपने कर्म से साबित किया है। विद्यालय की कक्षा चौथी में पढ़ने वाली एक छात्रा लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही थी। आर्थिक तंगी के कारण परिवार उसका समुचित उपचार कराने में असमर्थ था। ऐसे में शिक्षिका ने आगे बढ़कर परिवार को हिम्मत दी और छात्रा के इलाज की राह आसान कराई।
छात्रा के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और परिवार मजदूरी कर गुजर-बसर करता है। आर्थिक परेशानी के चलते बच्ची के उपचार में लगातार अड़चन आ रही थी। उसकी समस्या की जानकारी होने पर शिक्षिका ज्योति यादव ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने परिवार से संपर्क कर उन्हें उपचार के लिए तैयार किया और इलाज की पूरी प्रक्रिया में परिवार के साथ खड़ी रहीं। शिक्षिका ने परिजनों का हौसला बढ़ाने के साथ उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं और उपचार की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया।
– सी.एच ओ पवन यादव की रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस प्रयास में उपस्वास्थ्य केंद्र खोखरा में पदस्थ सी.एच ओ पवन यादव ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिवार के पास आयुष्मान कार्ड नहीं होने के कारण उपचार शुरू कराने में परेशानी आ रही थी। पवन यादव की सक्रियता से आयुष्मान कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी हुई। इसके बाद छात्रा को उपचार के लिए पाढर अस्पताल ले जाया गया।
आयुष्मान भारत योजना के सहयोग से पाढर अस्पताल में छात्रा का नि:शुल्क सफल ऑपरेशन हुआ। उपचार के बाद उसे लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य समस्या से राहत मिली। बच्ची के स्वस्थ होने से परिवार खुश है। परिजनों ने शिक्षिका ज्योति यादव, सीएचओ पवन यादव और उपचार में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
– 17 साल काजली में भी बच्चों के लिए किया काम
शिक्षिका ज्योति यादव इससे पहले शाहपुर के काजली में 17 वर्षों तक पदस्थ रही हैं। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के साथ बच्चों की शिक्षा और उनके शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया। उनके प्रयासों से कई विद्यार्थियों का चयन मॉडल स्कूल एवं विशिष्ट विद्यालयों में हुआ। उनके कार्य और व्यवहार से प्रभावित काजली के ग्रामीणों ने स्थानांतरण के समय उन्हें भावभीनी विदाई दी थी।
इसी वर्ष जुलाई में ईपीईएस शाला खोखरा रैय्यत में पदस्थ होने के बाद भी ज्योति यादव ने अपने सेवा भाव को जारी रखा। एक जरूरतमंद छात्रा के उपचार में उनकी पहल ने शिक्षक की भूमिका को कक्षा की सीमाओं से आगे ले जाकर संवेदनशीलता और इंसानियत की मिसाल पेश की है।


