बेतुल

बैतूल शाहपुर में पट्टों पर सियासत, अध्यक्ष-पार्षदों की खींचतान के बीच गरीबों के आवास का मुद्दा गरमाया

नगर परिषद अध्यक्ष से तालमेल नहीं तो गरीबों के पट्टे निशाने पर! 2016 के पट्टे निरस्त कराने कलेक्टर के पास पहुंचे पार्षद

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
बैतूल। शाहपुर में नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षदों के बीच कथित खींचतान अब गरीब परिवारों को वर्ष 2016 में दिए गए आवासीय पट्टों तक पहुंचती नजर आ रही है। एक ओर भाजपा सबका साथ, सबका विकास की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शाहपुर में 2016 में आवासविहीन और भूमिहीन परिवारों को दिए गए पट्टों को निरस्त कराने की मांग को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा मंडल अध्यक्ष एवं पार्षद नीतू गुप्ता सहित अन्य पार्षदों द्वारा कलेक्टर को ज्ञापन देकर पुराने पट्टों को निरस्त कराने की मांग किए जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि नगर परिषद की अंदरूनी खींचतान का असर उन आम परिवारों पर क्यों पड़े, जिन्हें वर्षों पहले आवास के लिए भूमि आवंटित की गई थी।
दरअसल, नगर परिषद शाहपुर के पांच पार्षदों ने वर्ष 2024-25 में जारी आवासीय पट्टों और उनके आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिए जाने की प्रक्रिया की जांच की मांग को लेकर बैतूल कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन पर वार्ड क्रमांक 3 की पार्षद एवं भाजपा मंडल अध्यक्ष नीतू गुप्ता, वार्ड क्रमांक 9 के पार्षद, इंद्रा कापसे, वार्ड क्रमांक 6 के पार्षद अंकुर राठौर, वार्ड क्रमांक 14 की पार्षद फूलवती यादव और वार्ड क्रमांक 7 के पार्षद गुड्डा उमेश बागड़े के हस्ताक्षर हैं।
पार्षदों ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2024-25 में आवासीय पट्टे जारी करने और उनके आधार पर पीएम आवास योजना में नाम शामिल करने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और पक्षपात किया गया। उनका दावा है कि नगर परिषद अध्यक्ष के वार्ड तथा उनके परिचितों और समर्थकों को प्राथमिकता देते हुए कुछ लोगों को लाभ पहुंचाया गया, जबकि वास्तविक जरूरतमंद गरीब, भूमिहीन और आवासविहीन परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गए। शिकायत में पट्टा आवेदन से लेकर स्वीकृति और पीएम आवास की सूची में नाम शामिल करने तक की प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।
ज्ञापन में पार्षदों ने वर्ष 2024-25 के सभी आवेदनों और उनके निराकरण, पट्टों की पात्रता, भूमि की स्थिति एवं दस्तावेजों के सत्यापन तथा पट्टा जारी होने से पीएम आवास स्वीकृति तक की प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
इसके अलावा नगर परिषद अध्यक्ष और पदाधिकारियों के परिचितों को दिए गए कथित लाभ की जांच, योजना से वंचित वास्तविक पात्र गरीबों को लाभ दिलाने, अपात्र पाए जाने वालों से शासकीय राशि की वसूली तथा जांच पूरी होने तक संदिग्ध मामलों में पीएम आवास की अगली किस्त रोकने की मांग की गई है। पार्षदों ने स्थानीय प्रभाव से मुक्त सक्षम जांच दल गठित कर जांच रिपोर्ट शिकायतकर्ताओं को उपलब्ध कराने की मांग भी की है।
– 2016 के पट्टों को लेकर अलग सवाल
मामले का दूसरा पहलू वर्ष 2016 में वितरित किए गए आवासीय पट्टों से जुड़ा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 27 सितंबर 2016 को तत्कालीन ग्राम पंचायत शाहपुर की सरपंच श्रीमती संगीताबाई उइके द्वारा मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत भूमिहीन गरीब परिवारों को प्रारूप 116 के अंतर्गत आवासीय भू-स्वामी पट्टे जारी किए गए थे। पटवारी हल्का क्रमांक 37 बरबतपुर की खसरा नंबर 60/0.5, 67/1, 85 आदि भूमि पर 600 वर्गफुट, 625 वर्गफुट, 875 वर्गफुट और 648 वर्गफुट के भूखंड सुशीला धुर्वे, रेखा धुर्वे, द्रौपदी, संगीता सहित अन्य परिवारों को दिए गए थे। पट्टों में पांच वर्ष के भीतर गृह निर्माण और दस वर्ष तक अहस्तांतरणीय रहने जैसी शर्तें दर्ज थीं।
अब इन्हीं पट्टों को निरस्त कराने की मांग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि नगर परिषद अध्यक्ष और कर्मचारियों से तालमेल नहीं बनने के कारण भाजपा मंडल अध्यक्ष नीतू गुप्ता एवं अन्य पार्षदों द्वारा पुराने पट्टों को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। हालांकि यह आरोप राजनीतिक पक्ष से जुड़े हैं और इनकी वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। महत्वपूर्ण यह भी है कि वर्ष 2016 में पट्टे तत्कालीन ग्राम पंचायत द्वारा वितरित किए गए थे, ऐसे में उन पट्टों की वैधता और उन्हें निरस्त करने का आधार प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच का विषय है।
– पार्षद की भूमिका पर भी उठे सवाल
इसी विवाद के बीच ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले वार्ड क्रमांक 7 के पार्षद गुड्डा उमेश बागड़े को लेकर भी आरोप सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर लगाए गए आरोप के अनुसार, पार्षद बागड़े ने पीएम आवास योजना का लाभ जिस भूमि के पट्टे के आधार पर लिया, उस स्थान पर निर्माण न करते हुए अन्य भूमि पर आवास का निर्माण किया। यदि ऐसा हुआ है तो यह योजना के नियमों के अनुपालन का विषय बनता है और इसकी भी दस्तावेजों के आधार पर जांच की आवश्यकता है।
ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पीएम आवास योजना में नियमों के पालन को लेकर दूसरों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो शिकायतकर्ता पार्षद से जुड़े मामले की भी निष्पक्ष जांच क्यों न हो। हालांकि इस संबंध में भी अंतिम स्थिति संबंधित रिकॉर्ड और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
– बीएलसी सूची में दर्ज हैं कई नाम
नगर परिषद शाहपुर की प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के बीएलसी घटक की सूची में अमित साहू वार्ड 8, अखिलेश शुक्ला वार्ड 7, मोतीलाल इवाने वार्ड 8, प्रभा साहू वार्ड 9, रेखा, बबलू अकोडिया, द्रोपती बाई कहार, रुक्मणी, गीता घोरपड़े, सुनील, सरिता कहार, तर्जन चाडोकार, संतोष वार्ड 10 तथा प्रेमा यादव वार्ड 13 के नाम शामिल बताए गए हैं। शिकायत के बाद इन मामलों में पात्रता, दस्तावेजों और पट्टा से लेकर पीएम आवास स्वीकृति तक की प्रक्रिया की जांच की मांग उठी है।
– अब जांच से साफ होगी तस्वीर
शाहपुर में पट्टा और पीएम आवास को लेकर उठे विवाद में एक तरफ वर्ष 2024-25 में जारी पट्टों और पीएम आवास आवंटन की निष्पक्ष जांच की मांग है, तो दूसरी तरफ वर्ष 2016 में गरीब परिवारों को दिए गए पट्टों को निरस्त कराने की मांग ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। पूरे मामले में आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब जिला प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि वर्ष 2024-25 के आवंटनों में नियमों का पालन हुआ या नहीं और वर्ष 2016 के पट्टों को निरस्त करने का कोई वैधानिक आधार मौजूद है या नहीं।
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