कैराना
स्वास्थ्य विभाग ने तीन क्लीनिक किए सील, हड़कंप
चौक बाजार में की गई कार्रवाई, नोटिस के बावजूद नहीं दिखाए थे दस्तावेज, एफआईआर की चेतावनी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कैराना। नगर में स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी निरंतर जारी है। सहायक नोडल अधिकारी ने आधा दर्जन क्लीनिकों पर जांच—पड़ताल की। इस दौरान पूर्व में नोटिस के बावजूद दस्तावेज नहीं दिखाने पर तीन क्लीनिकों को सील कर दिया गया। उन्होंने एफआईआर की भी चेतावनी दी है। इस कार्रवाई के चलते अन्य क्लीनिक संचालकों में हड़कंप मचा रहा।
गुरुवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे झोलाछाप मामलों के सहायक नोडल अधिकारी डॉ. दीपक कुमार टीम के साथ मुख्य चौक में बाजार पहुंचे। टीम ने लाइफ लाइन बेबी क्लीनिक, ‘मोटापा घटायें या वजन बढ़ायें’ नामक क्लीनिक और आरके डेंटल केयर क्लीनिक का गहन निरीक्षण किया। एक क्लीनिक में मासूम बच्चा भी भर्ती मिला, जिसे उपचार के लिए सरकारी अस्पताल जाने की सलाह दी गई। इसके बाद तीनों क्लीनिकों को दस्तावेज नहीं दिखाने पर सील कर दिया गया। इसके अलावा तीन अन्य क्लीनिकों पर भी जांच की गई, जिनके कागजात पूरे पाए गए। सहायक नोडल अधिकारी डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि टीम की ओर से नगर में छह-सात क्लीनिकों का निरीक्षण किया गया। कुछ क्लीनिक संचालकों ने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए, जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। वहीं, तीन क्लीनिक संचालक रजिस्ट्रेशन समेत अन्य आवश्यक कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके। इनके संचालकों को पूर्व में भी नोटिस जारी किए जा चुके थे। नोटिस का जवाब नहीं मिलने के कारण तीनों क्लीनिकों को सील कर दिया गया। उन्होंने बताया कि संबंधित क्लीनिक संचालकों को दस्तावेज उपलब्ध कराने का एक और अवसर दिया जा रहा है। यदि आवश्यक कागजात प्रस्तुत नहीं किए गए तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
कहीं कार्रवाई तो कहीं मेहरबानी?
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बीच कुछ क्लीनिक संचालकों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। नगर में कई क्लीनिक संचालकों को 13 सितंबर को तीन दिन के नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद सभी मामलों में एक समान कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। नोटिस जारी होने के बाद संबंधित क्लीनिकों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई और किन आधारों पर उन्हें संचालन का अवसर दिया गया? इनमें लाइफ सेवर क्लीनिक का मामला चर्चा में हैं, क्योंकि पूर्व में यहां न्यू लाइफ चाइल्ड केयर के नाम से संचालन हुआ करता था। वर्ष 2023 में नवजात की मौत के बाद उक्त क्लीनिक को सील करने के साथ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग की मौजूदा कार्रवाई के बीच सवाल उठ रहा है कि पूर्व में नोटिस दिए गए मामलों में मेहरबानी क्यों हैं।
इन्होंने कहा…
सहायक नोडल अधिकारी ने अभी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। मैं उनसे बात करके जानकारी लेता हूं। लाइफ सेवर क्लीनिक के बारे में भी जानकारी ली जाएगी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
— डॉ. तृतीय कुमार सक्सेना, सीएमओ शामली।


