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एसआईआर पर घमासान

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, सीजेपी ने दी आंदोलन की चेतावनी; मुंबई से लेकर असम तक विरोध

नई दिल्ली । एसआईआर को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए 2 अक्तूबर से देशव्यापी प्रदर्शन का एलान किया है। वहीं, मणिपुर और महाराष्ट्र समेत कई जगहों पर कांग्रेस ने भी प्रदर्शन कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आखिर विपक्ष के इन आरोपों की वजह क्या है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं…
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोमवार को कहा कि संगठन अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं और ज्ञानेश कुमार को इन आरोपों पर जनता के सामने स्पष्टीकरण देना चाहिए।
रांका ने कहा कि एसआईआर 2 अक्तूबर से देशव्यापी प्रदर्शन शुरू करेगा और जब तक सीईसी अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सीजेपी ने इससे पहले 24 सितंबर को भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।
13 करोड़ नाम हटाने का आरोप-सीजेपी का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर किए गए। पार्टी ने इसे मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए ‘चुनाव आयोग ठीक करो’ अभियान शुरू किया है।
यह आंकड़ा और इससे जुड़े आरोप राजनीतिक बहस का विषय बने हुए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में भी एसआईआर के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की बात कही गई है।
आशुतोष रांका ने मांग की कि सीईसी ज्ञानेश कुमार प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इन आरोपों पर अपना पक्ष जनता के सामने रखें। उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठाए और पूछा कि भाजपा की ओर से सीईसी का बचाव क्यों किया जा रहा है। रांका ने यह भी कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार को लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि एसआईआर और चुनाव आयोग से संबंधित सामने आई रिपोर्टों में लगाए गए दावे सही हैं या गलत।
भोपाल में सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकतार्ओं की पुलिस से झड़प हो गई। कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगा रखे थे। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछार की। कांग्रेस ने दावा किया कि इस दौरान तीन कार्यकर्ता घायल हुए, जिनमें एक महिला भी शामिल है। प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार का मुखौटा पहने एक कार्यकर्ता को जंजीरों में बांधकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया और ह्यवोट चोर, गद्दी छोड़ह्ण के नारे लगाए।
गुवाहाटी में कांग्रेस की जिला इकाई ने असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के साथ मिलकर मणबेंद्र सरमा कॉम्प्लेक्स में प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकतार्ओं ने मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए और ह्यवोट चोरीह्ण के आरोपों पर जवाब मांगा। कांग्रेस का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए। यह प्रदर्शन देश के कई हिस्सों में चल रहे कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा है। पार्टी अलग-अलग राज्यों में चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज करा रही है और उएउ ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।
सूरत: कांग्रेस का प्रदर्शन, उएउ ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
गुजरात के सूरत में कांग्रेस कार्यकतार्ओं ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इस दौरान कार्यकतार्ओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कुछ कांग्रेस कार्यकतार्ओं को हिरासत में लिया। गुजरात में कांग्रेस ने सोमवार को राज्यभर में प्रदर्शन कर रकफ के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए और उएउ के इस्तीफे की मांग की।
असम में परिसीमन को लेकर भी आरोप
सीजेपी प्रवक्ता ने असम में विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन का फायदा सत्तारूढ़ भाजपा गठबंधन को मिला। हालांकि, ये आरोप रांका के राजनीतिक दावे हैं और इनके समर्थन में स्वतंत्र प्रमाण इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं हैं। रांका ने कहा कि संगठन लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना अभियान जारी रखेगा।
मणिपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन
इसी विवाद के बीच मणिपुर में कांग्रेस कार्यकतार्ओं ने सोमवार को कई जिलों में प्रदर्शन किया और सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। इंफाल ईस्ट में प्रदर्शनकारियों ने जिला आयुक्त कार्यालय के पास नारे लगाए और ‘लोकतंत्र बचाओ, चुनाव आयोग बचाओ’ तथा ‘हमारा वोट, हमारा अधिकार’ जैसे संदेशों वाले पोस्टर दिखाए। थौबल में प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार का पुतला भी जलाया। चुराचांदपुर में भी जिला कांग्रेस कमेटी के सदस्यों ने प्रदर्शन किया।
कांग्रेस नेताओं ने इन प्रदर्शनों को देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा बताया है। इससे पहले मणिपुर में कांग्रेस ने सीईसी के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था।
महाराष्ट्र में कांग्रेस का हल्लाबोल
महाराष्ट्र कांग्रेस ने सोमवार को राज्यभर में प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में अनियमितताएं हुई हैं और चुनाव आयोग का कामकाज पक्षपातपूर्ण रहा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सीईसी और चुनाव आयोग सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में काम कर रहे हैं।
नागपुर-पुणे में कांग्रेस ने क्या किया?
पुणे में कांग्रेस की जिला इकाई ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद पार्टी नेताओं ने डिप्टी कलेक्टर ज्योति कदम को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में पुणे शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रशांत जगताप और वरिष्ठ नेता मनोज जोशी भी शामिल हुए।
नागपुर में कांग्रेस कार्यकतार्ओं ने संविधान चौक पर प्रदर्शन किया और कलेक्ट्रेट की ओर मार्च किया। नागपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रफुल्ल गुडधे ने कहा कि ज्ञानेश कुमार भाजपा की ओर से काम कर रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र और मतदान के अधिकार पर हमला बताया। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव याज्ञवल्क्य जिचकर ने भी कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की।

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