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लोकतंत्र बचाओ मार्च

महागठबंधन के नेताओं ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, दीपंकर बोले- लड़ाई जारी रहेगी

पटना । बिहार में एसआईआर को लेकर सियासी घमासन जारी है। गांधी जयंती पर पटना के गांधी मैदान में महागठबंधन के नेताओं ने लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा का मुद्दा उठाया। दीपंकर भट्टाचार्य ने एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आइये जानते हैं किसने-क्या कहा?
गांधी जयंती के अवसर पर पटना के गांधी मैदान में गांधी मूर्ति पर माल्यार्पण के बाद ह्यलोकतंत्र बचाओ मार्चह्ण का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भाकपा माले, राजद समेत महागठबंधन के विभिन्न दलों के नेता, कार्यकर्ता, विधायक और पदाधिकारी शामिल हुए। मार्च के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से हटाए गए नामों को वापस जोड़ने की मांग उठाई गई। भाकपा माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने गांधी मैदान स्थित गांधी मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने ह्यलोकतंत्र बचाओ मार्चह्ण को संबोधित किया।
दीपंकर बोले- वोट के अधिकार पर हमला
सभा को संबोधित करते हुए दीपंकर भट्टाचार्य ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनावों को भाजपा के पक्ष में प्रभावित किए जाने के गंभीर सवाल सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर लिए जा रहे फैसलों और उन पर उठाई गई आपत्तियों का जिक्र किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन नागरिकों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, उनके नाम तत्काल वापस जोड़े जाने चाहिए। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग की।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
दीपंकर भट्टाचार्य ने 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में किए गए बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसके बाद चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका बढ़ी है। उन्होंने चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के संबंध में मिली कानूनी सुरक्षा को समाप्त करने की भी मांग की। उनका कहना था कि चुनाव आयोग को स्वतंत्र और जवाबदेह बनाने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
ह्यएसआईआर के पीछे 2020 और 2024 के चुनाव का संदर्भ
भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने बिहार में एसआईआर को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इसके पीछे 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव महत्वपूर्ण राजनीतिक संदर्भ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उनके अनुसार यह केवल मतदाता सूची का मामला नहीं है, बल्कि नागरिकों के मताधिकार से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि वोट के अधिकार की रक्षा और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
मनोज झा बोले- निष्पक्ष चुनाव के लिए आयोग का निष्पक्ष होना जरूरी
राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि गांधी जयंती पर महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि देशवासी लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं होंगे तो देश में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकेंगे और लोकतंत्र भी प्रभावित होगा।

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