सिंगरौली
भगवती मानव कल्याण संगठन ने कलेक्टर को सौंपा तीन सूत्रीय ज्ञापन
नशामुक्ति, गौ रक्षा और कोयला परिवहन से होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक लगाने की मांग

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली (मध्य प्रदेश)। भगवती मानव कल्याण संगठन, जिला इकाई सिंगरौली द्वारा जिले में गहराती सामाजिक व बुनियादी समस्याओं को लेकर मध्य प्रदेश के माननीय कलेक्टर महोदय को एक तीन सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया है। संगठन के जिला प्रभारी प्रेम सागर गुप्ता के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में नशामुक्ति, गौ रक्षा तथा कोयला परिवहन के कारण बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं के स्थायी समाधान की मांग की गई है।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है:
1. नशामुक्ति एवं अवैध मादक पदार्थों पर सख्ती
अवैध बिक्री पर रोक: जिले में अवैध शराब, गांजा एवं अन्य मादक पदार्थों की बिक्री और परिवहन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
लाइसेंस निरस्तीकरण: शराब ठेकेदारों द्वारा तय दुकानों के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर अवैध बिक्री किए जाने पर कठोर कार्रवाई हो। यदि तीन या उससे अधिक बार नियम उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित दुकान का लाइसेंस निरस्त किया जाए।
अधिकारियों की जवाबदेही: अवैध नशे के कारोबार पर लापरवाही बरतने वाले पुलिस एवं आबकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। जिस थाना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध नशा पाया जाए, वहां के थाना प्रभारी के विरुद्ध विभागीय जांच कर नियम अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
2. गौ रक्षा एवं बेसहारा गौवंश का संरक्षण
तस्करी पर रोक: जिले में गौवंश के अवैध परिवहन एवं गौ तस्करी पर प्रभावी रोक लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
गौशालाओं की निगरानी: सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गौवंश के संरक्षण हेतु उचित व्यवस्था की जाए तथा संचालित गौशालाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर भी अंकुश लग सके।
3. कोयला परिवहन से दुर्घटनाओं की रोकथाम व मुआवजे की नीति
अदाणी व औद्योगिक परियोजनाओं हेतु अलग फोरलेन: जिले में अदाणी कंपनी सहित विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के लिए कोयला परिवहन में लगे भारी वाहनों से लगातार जानलेवा हादसे हो रहे हैं। इसके लिए सामान्य यातायात से अलग एक स्वतंत्र ‘फोरलेन कोयला सड़क’ का निर्माण कराया जाए।
रूट व गति सीमा का निर्धारण: जब तक पृथक मार्ग का निर्माण नहीं होता, तब तक कोयला वाहनों के लिए निर्धारित रूट, समय सीमा, गति नियंत्रण और ओवरलोडिंग पर सख्त निगरानी रखी जाए।
₹1 करोड़ आर्थिक सहायता/मुआवजा: कोयला परिवहन में लगे वाहनों की चपेट में आने से किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता/मुआवजा उपलब्ध कराने हेतु शासन स्तर पर नीति बनाने की मांग की गई है।
संगठन ने चेतावनी व निवेदन के लहजे में कहा है कि जनहित एवं आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी इन संवेदनशील समस्याओं पर संबंधित विभाग व अधिकारी शीघ्र अति शीघ्र संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।



