हजारों करोड़ का राजस्व देने वाले पाकुड़ में यात्री सुविधाओं का इंतजार, दिल्ली- पटना के लिए सीधी ट्रेन की फिर उठी मांग, जीएम का दौरा पर सपने अभी भी अधूरे
Pakur, a major revenue generator worth thousands of crores, awaits passenger amenities; demand for a direct train to Delhi-Patna resurfaces; despite a visit by the General Manager, hopes remain unfulfilled.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। ईस्टर्न रेलवे की नवपदस्थापित महाप्रबंधक (GM) गीतिका पांडे बुधवार को विशेष सैलून से पाकुड़ रेलवे स्टेशन पहुंचीं। उनके आगमन पर रेलवे अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। GM ने पाकुड़ रेलवे स्टेशन की विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ-साथ पाकुड़ रेलखंड में स्थित कोयला लोडिंग साइडिंग का भी निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों से संचालन एवं व्यवस्थाओं की जानकारी ली। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर अपने निर्धारित कार्यक्रम और आवश्यकता के अनुसार हावड़ा डिवीजन के पाकुड़ रेलवे स्टेशन तथा पाकुड़ रेलखंड में स्थित कोयला एवं पत्थर लोडिंग साइडिंग का निरीक्षण करते रहे हैं। ऐसे निरीक्षणों की खबरें भी अक्सर सुर्खियां बनती हैं। नवपदस्थापित GM के पाकुड़ दौरे से स्थानीय लोगों और रेल यात्रियों को भी लंबे समय से लंबित मांगों के पूरा होने की उम्मीद जगी है। पाकुड़ रेलखंड रेलवे के लिए माल ढुलाई और राजस्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हावड़ा स्टेशन के बाद हावड़ा डिवीजन को महत्वपूर्ण राजस्व देने वाले रेलखंडों में शामिल होने के बावजूद पाकुड़ रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं और लंबी दूरी की सीधी ट्रेनों के मामले में अपेक्षित विस्तार नहीं हो सका है। पाकुड़ जिला मुख्यालय होने के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद समेत सीमावर्ती इलाकों के लोगों के लिए भी यह स्टेशन महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री यहां से लंबी दूरी की यात्रा के लिए रवाना होते हैं। लेकिन प्रमुख शहरों के लिए पर्याप्त सीधी ट्रेनें उपलब्ध नहीं होने के कारण यात्रियों को दूसरे स्टेशनों पर ट्रेन बदलने की मजबूरी होती है। इससे यात्रियों को अतिरिक्त समय और आर्थिक खर्च के साथ-साथ सामान लेकर ट्रेन बदलने की परेशानी भी झेलनी पड़ती है। स्थानीय लोगों की सबसे पुरानी मांगों में पाकुड़ से देश की राजधानी दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन का परिचालन प्रमुख है। इसके अलावा पटना सहित अन्य प्रमुख शहरों के लिए भी सीधी रेल सेवा शुरू करने की मांग लगातार उठती रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकुड़ रेलखंड के निरीक्षण के दौरान समय-समय पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से यात्री सुविधाओं और नई ट्रेनों के परिचालन को लेकर उम्मीदें जताई गईं, लेकिन अब तक दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन की मांग पूरी नहीं हो सकी है। यात्रियों का कहना है कि निरीक्षण और आश्वासन लगातार मिलते रहे, लेकिन धरातल पर अपेक्षित बदलाव का इंतजार आज भी कायम है। कोरोना काल के दौरान बंद की गई कई ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से पूर्व स्थिति में बहाल नहीं होने को लेकर भी स्थानीय यात्रियों में असंतोष है। दैनिक यात्रियों और छोटे व्यापारियों के लिए इन ट्रेनों का परिचालन महत्वपूर्ण था। ट्रेनों की कमी के कारण उन्हें वैकल्पिक साधनों या दूसरे स्टेशनों पर जाकर यात्रा करने की मजबूरी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पाकुड़ रेलखंड रेलवे के लिए राजस्व की दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण है, तो उसी अनुपात में यात्री सुविधाओं का विस्तार भी होना चाहिए। वही पाकुड़ जिला मुख्यालय होने के बावजूद रेलवे स्टेशन पर पूर्ण जीआरपी थाना नहीं होने का मुद्दा भी स्थानीय लोगों के बीच लंबे समय से उठता रहा है। वर्तमान में स्टेशन पर जीआरपी पुलिस पोस्ट (पीपी) की व्यवस्था है। रेलवे से संबंधित मामलों में स्थानीय यात्रियों को बरहड़वा रेलवे स्टेशन स्थित जीआरपी थाना का रुख करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे विशेषकर गरीब और सामान्य तबके के यात्रियों को अतिरिक्त आर्थिक खर्च और अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पाकुड़ रेलवे स्टेशन पर स्वतंत्र जीआरपी थाना स्थापित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। GM गीतिका पांडे के पाकुड़ दौरे के बाद स्थानीय रेल यात्रियों, ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। लोगों को उम्मीद है कि नवपदस्थापित GM पाकुड़ की यात्री सुविधाओं, लंबी दूरी की ट्रेनों और बंद ट्रेनों के पुनः परिचालन से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देंगी। हालांकि, स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि वर्षों से चली आ रही मांगों और पूर्व में मिले आश्वासनों के बीच अब वे केवल घोषणा नहीं, बल्कि धरातल पर सीधी ट्रेन सेवा और बेहतर यात्री सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि GM गीतिका पांडे के दौरे के बाद पाकुड़ के रेल यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर कितना ठोस निर्णय होता है और क्या दिल्ली-पटना जैसे प्रमुख शहरों के लिए सीधी रेल सेवा का सपना वास्तव में साकार हो पाता है या फिर सपनों की उम्मीदें मायूसी में तब्दील होगा, जो तत्काल चाहते हुए भी दर्शाना कलमकार के लिए सम्भव नहीं है।

