
महिला कांग्रेस ने एसपी को सौंपा ज्ञापन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। डीजे नहीं बजेगा तो क्या मां दुर्गा का विसर्जन नहीं होगा? क्या माता रानी की विदाई मैयत कहलाएगी? मुलताई में भाजपा नगर महामंत्री एवं एल्डरमैन निलेश चावरिया के कथित बयान पर महिलाओं ने यही सवाल उठाकर विरोध तेज कर दिया है। महिला कांग्रेस ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर एफआईआर दर्ज करने और निलेश चावरिया को पद से हटाने की मांग की। महिलाओं ने दो टूक कहा- माता रानी की भक्ति डीजे के शोर से नहीं, श्रद्धा से होती है।
दरअसल विवाद की शुरुआत शांति समिति की बैठक में डीजे की तेज आवाज पर रोक लगाने के मुद्दे से हुई थी। नागरिक अनिल सोनी ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए तेज आवाज वाले डीजे पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था। आरोप है कि इसके विरोध में निलेश चावरिया ने कहा, “डीजे नहीं बजा तो मातारानी का विसर्जन नहीं, मैयत निकालेंगे।” कथित बयान का वीडियो सामने आने के बाद धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग उठी।
बैठक में विधायक चंद्रशेखर देशमुख, नगर पालिका अध्यक्ष नीतू प्रहलाद परमार सहित पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे। ऐसे में कथित टिप्पणी पर तत्काल आपत्ति और कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
महिला कांग्रेस की संस्कृति प्रभारी प्रेरणा शर्मा ने कहा कि मां दुर्गा के विसर्जन जुलूस की तुलना ‘मैयत’ से करना धार्मिक आस्था और नारी शक्ति का अपमान है। उन्होंने सवाल उठाया कि विधायक और अधिकारियों की मौजूदगी में ऐसी टिप्पणी पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने वायरल वीडियो की जांच कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
शिकायतकर्ता मोनिका निरापुरे ने कहा कि ऐसी टिप्पणी से सनातनी हिंदुओं की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची है। धर्म और परंपराओं के नाम पर कानून तथा प्रशासन पर दबाव बनाना उचित नहीं है। कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। वहीं,
जमुना पंडाग्रे ने कहा कि मां दुर्गा के विसर्जन को ‘मैयत’ बताना धार्मिक आस्था का अपमान है। माता रानी की भक्ति डीजे के शोर से नहीं, मन की श्रद्धा से होती है। धार्मिक आयोजनों को लेकर ऐसी अमर्यादित टिप्पणी करने का किसी को अधिकार नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या डीजे नहीं बजने पर माता रानी की विदाई नहीं होगी? उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित भाजपा नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उन्हें पद से हटाया जाए। धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामले में कानून के तहत निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
एसपी को सौंपे गए ज्ञापन पर प्रेरणा शर्मा, मोनिका निरापुरे, जमुना पंडाग्रे, नंदिनी तिवारी, सुशीला तिवारी, गंगा अहाके, अनीता मसतकर, ललिता, अर्चना, पूजा अतुलकर और रश्मि उइके सहित दर्जनों महिलाएं शामिल थी। शिकायतकर्ताओं ने वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कर आरोप सही पाए जाने पर एफआईआर दर्ज करने और निलेश चावरिया को पद से निष्कासित करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि समय पर कार्रवाई नहीं होने पर विरोध को व्यापक किया जाएगा।



