सिंगरौली

रात ढलते ही मिलावट का आरोप 

पावसुन वाशरी के बाहर भस्सी के ढेर ने बढ़ाई बेचैनी

पावसुन से प्रयागराज पावर प्लांट तक कोयला आपूर्ति की चर्चा, लोडिंग से पहले और बाद की जांच जरूरी बताई गई
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
 सिंगरौली। बरगवां थाना क्षेत्र के भलुगढ़ स्थित पावसुन इंडस्ट्री का कोल वाशरी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वाशरी को चारों तरफ से ढंककर रखे जाने और बाहर बड़ी मात्रा में भस्सी यानी स्टोन डस्ट का स्टॉक दिखाई देने के बाद स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोप है कि रात होते ही पावर प्लांट के लिए रेलवे रैक में लोड होने वाले कोयले में भस्सी और रिजेक्ट सामग्री की कथित मिलावट की जाती है।
पावसुन इंडस्ट्री लिमिटेड वाशरी से रेलवे रैक के जरिए अलग-अलग पावर कंपनियों को कोयले की आपूर्ति होने की बात सामने आ रही है। प्रयागराज पावर प्लांट तक भी यहां से कोयला भेजे जाने की चर्चा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वाशरी के बाहर रखा भस्सी का इतना बड़ा स्टॉक आखिर किस उपयोग के लिए है और इसकी आवाजाही का रिकॉर्ड कहां दर्ज होता है? यदि कोयले में मिलावट की शिकायतों की निष्पक्ष जांच करनी है तो केवल वाशरी परिसर के भीतर की जांच पर्याप्त नहीं होगी। खदान से निकलने वाले कोयले, वाशरी पहुंचने के समय, रेलवे रैक में लोडिंग तक यानी तीन स्तर पर स्वतंत्र सैंपलिंग जरूरी है।
प्रशासन, रेलवे, संबंधित कोयला कंपनी और पावर प्लांट प्रबंधन यदि संयुक्त जांच कर नमूनों की लैब रिपोर्ट मिलाएं तो यह साफ हो सकता है कि कोयले की गुणवत्ता कोल वासरी में बदल रही है या नहीं। साथ ही वाशरी के सीसीटीवी, स्टॉक रजिस्टर और रात में होने वाली गतिविधियों की जांच भी कई सवालों का जवाब दे सकती है। वहीं स्थानीय स्तर पर आरोप है कि पावसुन वाशरी के आसपास कंपनी से जुड़े लोग लगातार निगरानी और गश्त करते दिखाई देते हैं। सवाल यह नहीं कि कोई कंपनी अपनी संपत्ति की सुरक्षा क्यों कर रही है, बल्कि सवाल यह है कि जब उसी परिसर को चारों तरफ से ढंककर रखा गया हो और बाहर भस्सी का स्टॉक मौजूद हो तो गतिविधियों को लेकर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।
वाशरी पैक क्यों, बाहर भस्सी किसलिए?
पावसुन कोल वाशरी को चारों तरफ से ढंका जाना और बाहर भस्सी का स्टॉक होना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह है कि यदि वाशरी में सब कुछ निर्धारित प्रक्रिया के तहत हो रहा है तो बाहर पड़े स्टोन डस्ट की मात्रा, उसके स्रोत और उपयोग का रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच में क्यों न लाया जाए? आरोप है कि रात के समय इसी सामग्री को पावर प्लांट जाने वाले कोयले में मिलाया जाता है। इसकी पुष्टि तभी संभव है जब प्रशासन स्टॉक, परिवहन रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और रेलवे रैक लोडिंग की संयुक्त जांच कराए।
खदान से प्लांट तक हो चार स्तर पर सैंपलिंग
कोयले में कथित मिलावट का सच जानने के लिए एक स्थान से नमूना लेना पर्याप्त नहीं होगा। खदान से निकलते समय पहला सैंपल, वाशरी पहुंचने पर दूसरा, रेलवे रैक में लोडिंग के बाद तीसरा और पावर प्लांट में अनलोडिंग के समय चौथा नमूना लिया जाए। यदि चारों नमूनों की राख, गुणवत्ता और अशुद्धियों की रिपोर्ट अलग-अलग आती है तो यह पता लगाना आसान होगा कि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई। स्वतंत्र एजेंसी से सैंपलिंग और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाए तो आरोपों और वास्तविकता के बीच का अंतर साफ हो सकता है।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button