बालाघाट

शिक्षा विभाग मे सहायक ग्रेड 3 से सहायक ग्रेड 2 मे पदोन्नति पर सवाल

जिला शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली जांच के घेरे में

उत्कृष्ट विद्यालय में पदस्थापना और डीईओ कार्यालय में लंबे समय से पदस्थ कर्मचारी की पदोन्नति पर उठे सवाल; स्वीकृत पदों और विभागीय नियमों के सत्यापन की मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
बालाघाट। जिला शिक्षा विभाग में उत्कृष्ट विद्यालय में पदस्थापना और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में कार्यरत एक कर्मचारी की पदोन्नति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि उत्कृष्ट विद्यालय में संबंधित पद स्वीकृत नहीं होने के बावजूद वहां उच्च पद पर पदस्थापना की गई। वहीं, डीईओ कार्यालय में लंबे समय से पदस्थ एक कर्मचारी को उसी कार्यालय में रहते हुए पदोन्नति दिए जाने पर भी विभागीय प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
स्वीकृत पद के बिना पदस्थापना कैसे ?
मामले में प्रमुख सवाल यह है कि यदि उत्कृष्ट विद्यालय में संबंधित पद स्वीकृत नहीं है, तो पदस्थापना किस आधार पर की गई। इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए विद्यालय के स्वीकृत पदों, पदस्थापना आदेश और संबंधित कर्मचारी की पदोन्नति से जुड़े अभिलेखों का परीक्षण जरूरी है। यदि स्वीकृत पद के अभाव में नियमों के विपरीत पदस्थापना की गई है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
डीईओ कार्यालय में पदोन्नति पर भी स्पष्टीकरण जरूरी
दूसरा मामला जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में लंबे समय से पदस्थ कर्मचारी की पदोन्नति से जुड़ा है। आरोप है कि कर्मचारी को उसी कार्यालय में पदस्थ रहते हुए उच्च पद का लाभ दिया गया। इस संबंध में यह स्पष्ट होना चाहिए कि पदोन्नति किस नियम, आदेश और प्रक्रिया के तहत हुई तथा पदोन्नति के बाद पदस्थापना के लिए लागू प्रावधानों का पालन किया गया या नहीं। केवल एक ही कार्यालय में लंबे समय तक पदस्थ रहने या वहीं पदोन्नति मिलने से अपने आप अनियमितता साबित नहीं होती, लेकिन परिस्थितियों और नियमों की जांच जरूरी है।
लेन-देन के आरोपों की जांच हो
दोनों मामलों में आर्थिक लेन-देन और पक्षपात के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए फिलहाल कोई दस्तावेजी साक्ष्य सामने नहीं है। ऐसे में आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय संबंधित आदेशों, सेवा अभिलेखों और पद स्वीकृति से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर जांच की जानी चाहिए।
शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच कराकर पदस्थापना और पदोन्नति की वैधानिकता स्पष्ट करनी चाहिए। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन या किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, विभाग को जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
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