नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी गाजियाबाद : लोनी की राजनीति इन दिनों एक अजीब दौर से गुजर रही है। जहां एक ओर भाजपा के कार्यकर्ता हर गली-मोहल्ले में सक्रिय दिखाई देते हैं, वहीं दूसरी ओर सपा, बसपा, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल जैसे दल मानो लोनी की जमीन से पूरी तरह गायब हो चुके हैं। सवाल यह है कि आखिर लोनी की जनसमस्याओं पर ये दल खामोश क्यों हैं?
हकीकत यह है कि इन दलों के अधिकांश पदाधिकारी अब केवल व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया तक ही सीमित होकर रह गए हैं। कभी-कभार कोई फोटो पोस्ट कर दी, पदनाम के साथ एक पोस्ट डाल दी और समझ लिया कि राजनीतिक जिम्मेदारी पूरी हो गई। लेकिन जब बात लोनी की असली जन समस्याओं की आती है, तो यही नेता कही नजर नहीं आते।
पिछले छह महीनों पर नजर डालें तो नगरपालिका या तहसील स्तर पर जनहित के किसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों का कोई बड़ा प्रदर्शन या धरना तक दिखाई नहीं देता। हां, कभी-कभार समाजवादी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं की सोशल मीडिया पोस्ट जरूर नजर आ जाती है, लेकिन जमीन पर आंदोलन लगभग शून्य है।
दूसरी तरफ लोनी में भाजपा कार्यकर्ताओं की भरमार है। हर गली और हर कॉलोनी में भाजपा का कोई न कोई कार्यकर्ता मिल ही जाता है। हालांकि यह भी सच है कि क्षेत्र में ऐसे कई कार्यकर्ता भी हैं जो राजनीति को जनसेवा से ज्यादा अपनी धाक जमाने का जरिया बना चुके हैं। किसी क्षेत्रीय नेता के सहारे अपने निजी काम निकालना और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करना ही उनका मुख्य कौशल बन गया है।
भाजपा के अंदर चल रही गुटबाजी भी किसी से छिपी नहीं है। हालत यह है कि हर हफ्ते कोई न कोई छुटभैया नेता सोशल मीडिया पर लाइव आकर इशारों-इशारों में अपने ही साथियों की टांग खींचता नजर आता है। लेकिन इन सब राजनीतिक तमाशों के बीच सबसे ज्यादा परेशान लोनी की आम जनता है, जिसे अपनी समस्याओं का समाधान कहीं नजर नहीं आता।
लोनी के लोग सब कुछ समझ रहे हैं—कौन सही है, कौन गलत है—लेकिन राजनीतिक तनाव से बचने के लिए अक्सर चुप रहना ही बेहतर समझते हैं। अब देखना यह है कि लोनी की जनता इस राजनीतिक चुप्पी और दिखावे की राजनीति को आखिर कब तक सहन करती है। समय आने पर जनता ही इसका जवाब
