बरेली
सनराइज अस्पताल में इलाज के नाम पर मौत का खेल और सिस्टम की खामोशी
3 दिन से धरने पर पीड़ित परिवार

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली का सनराइज अस्पताल कांड अब जनआक्रोश में बदलता जा रहा है। सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में पीड़ित परिवार का अनिश्चितकालीन धरना आज तीसरे दिन भी जारी रहा, लेकिन प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी ने सवालों को और गहरा कर दिया है।
धरने पर बैठे परिजनों का आरोप है कि 25 सितंबर 2025 को भर्ती कराए गए उर्वेश यादव की 2 अक्टूबर को हुई मौत कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि “गलत इलाज से हुई हत्या” है। उनका कहना है कि अस्पताल संचालक डॉक्टर रेहान अहमद, जो कि एनेस्थीसिया विशेषज्ञ हैं, उन्होंने लीवर की गंभीर बीमारी का इलाज किया—और यही लापरवाही जानलेवा साबित हुई। मेडिकल बोर्ड की जांच भी इस आरोप को बल देती है, जिसमें डॉक्टर को गलत इलाज का दोषी माना गया है।
मामले ने तब और गंभीर मोड़ लिया जब आयुष्मान योजना के तहत बड़े घोटाले का खुलासा हुआ। परिजनों के अनुसार, आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उनसे करीब साढ़े पांच लाख रुपये वसूले गए, जबकि बिल मात्र 2.70 लाख रुपये का दिया गया। मेडिकल जांच में भी 2.70 लाख रुपये की अवैध वसूली की पुष्टि हुई, जिसे बाद में स्वास्थ्य विभाग के आदेश पर वापस कराया गया—लेकिन शेष रकम का कोई हिसाब नहीं मिला।
धरने के तीसरे दिन परिजनों का गुस्सा साफ झलक रहा है। उनका कहना है कि पुलिस जांच भी निष्पक्ष नहीं हो रही। विवेचक मुनेंद्र सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए परिवार ने कहा कि वह लगातार समझौते का दबाव बना रहे हैं और आरोपियों से बात करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इतना ही नहीं, जांच रिपोर्ट आने के बावजूद उचित धाराएं नहीं बढ़ाई जा रही हैं और तीन महीने से मामले को लटकाया जा रहा है।
मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में अस्पताल को आयुष्मान योजना से बाहर करने, ब्लैकलिस्ट करने और अवैध वसूली पर 10 गुना जुर्माना लगाने और अस्पताल को तुरंत बंद करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट जिला अधिकारी को सौंप दी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है—यही बात परिजनों के आक्रोश को और भड़का रही है।



