सिंगरौली

सिंगरौली पुलिस का शर्मनाक दोहरा चेहरा

कप्तान की 'नशा मुक्ति' की हुंकार, तो बरगवां में कारखास अरविंद यादव की नशा-परस्ती!

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली : क्या सिंगरौली पुलिस अधीक्षक का इक़बाल खत्म हो चुका है? क्या उनके ‘जीरो टॉलरेंस’ के आदेश बरगवां थाने की दहलीज पर दम तोड़ देते हैं? ये सवाल आज सिंगरौली की जनता पूछ रही है। एक तरफ पुलिस कप्तान प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैमरों के सामने ‘ड्रग फ्री मिशन’ का ढोल पीट रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनके ही विभाग का कारखास अरविंद यादव कथित तौर पर नशे के सौदागरों का ‘रक्षक’ बनकर खड़ा है।
खाकी के भेष में सफेदपोश अपराधियों का साथ!
बरगवां थाना क्षेत्र से आ रहे आरोप पुलिसिया तंत्र के मुंह पर तमाचा हैं। ग्रामीणों का सीधा और साफ आरोप है कि अरविंद यादव के संरक्षण में क्षेत्र में गांजा और हेरोइन की नदियां बह रही हैं। यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि वर्दी के साथ गद्दारी है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और नशे के सौदागरों से हाथ मिला ले, तो कप्तान के ‘मिशन’ का सफल होना नामुमकिन है।
क्या एसपी साहब का  आदेश कारखाश के लिए मात्र एक पेपर है?
यह बेहद गंभीर विषय है कि पूरे जिले में नशे के खिलाफ मुहिम छिड़ी है, लेकिन बरगवां थाने का यह ‘खास’ सिपाही अपनी समानांतर सरकार चला रहा है। जनता पूछ रही है:
क्या अरविंद यादव पुलिस अधीक्षक के आदेशों से भी ऊंचा है? * क्या कप्तान की नाक के नीचे चल रहे इस गोरखधंधे की उन्हें खबर नहीं, या फिर कार्रवाई करने का साहस नहीं?
आखिर क्यों एक छोटे से कारखास के रसूख के आगे पूरा नशा विरोधी अभियान बौना साबित हो रहा है?
ग्रामीणों की चेतावनी: “अगर जल्द ही नशे के अड्डों और उन्हें संरक्षण देने वाले अरविंद यादव जैसे पुलिसकर्मियों पर गाज नहीं गिरी, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि ‘ड्रग फ्री मिशन’ केवल फोटो खिंचवाने और वाहवाही लूटने का जरिया है।”
नशे की मंडी बना बरगवां: पुलिस की चुप्पी संदिग्ध
बरगवां में खुलेआम बिक रही हेरोइन और गांजा इस बात का सबूत है कि यहाँ कानून का राज नहीं, बल्कि अपराधियों और भ्रष्ट पुलिसकर्मियों का गठजोड़ चल रहा है। कप्तान साहब, प्रेस कॉन्फ्रेंस में कड़े शब्द बोलना आसान है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब आप अपने ही महक मे में पल रहे इन ‘नशा-दलालों’ को बाहर का रास्ता दिखाएंगे।
अब आर-पार की जंग की जरूरत
सिंगरौली की जनता अब खोखले वादों से थक चुकी है। यदि अरविंद यादव जैसे संदिग्ध किरदारों पर तुरंत कार्रवाई नहीं होती और बरगवां से नशे का काला कारोबार खत्म नहीं होता, तो पुलिस प्रशासन के खिलाफ जन-आक्रोश का फूटकर सड़कों पर आना तय है।
साहब! अपनी वर्दी की आन बचाइए और इस ‘कारखास’ के तिलिस्म को तोड़िए, वरना नशा मुक्त सिंगरौली का सपना महज एक मजाक बनकर रह जाएगा।
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