कुसमा फाटक – गगनपहाड़ी सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध, मुख्य मार्ग से निर्माण की मांग तेज
Villagers protest against the construction of the Kusma Phatak-Gaganpahari road, demanding that it be constructed from the main road.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़ जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्र गगनपहाड़ी– अमलपुर घाट (पश्चिम बंगाल सीमा) से भाया पाली मोड़, कुसमा फाटक होते हुए बरहरवा–पाकुड़ मुख्य सड़क तक प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य इन दिनों चर्चा में है। यह परियोजना करोड़ों की लागत से विधायक निशात आलम की पहल पर पथ निर्माण विभाग (RCD) द्वारा कराई जा रही है। हालांकि, जनहित में शुरू किए गए इस सड़क निर्माण कार्य का ग्रामीणों द्वारा विरोध भी सामने आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण गगनपहाड़ी की मुख्य सड़क से न कर गांव के बाहर बाईपास के रूप में कराया जा रहा है, जो स्थानीय लोगों के हित में नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, यदि सड़क का निर्माण मुख्य मार्ग से किया जाए तो गगनपहाड़ी, मणिकापाड़ा समेत आसपास के कई गांवों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी। इससे रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और क्षेत्र का समग्र विकास संभव होगा। वहीं, बाईपास सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि गांव के बाहर से सड़क बनने पर कई गरीब परिवारों की जमीन प्रभावित होगी। लोगों ने मेहनत से थोड़ी-थोड़ी जमीन खरीदकर घर बसाने की कोशिश की है, जो इस परियोजना में अधिग्रहण के कारण प्रभावित हो सकती है। इससे उनकी आजीविका पर भी संकट खड़ा हो सकता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पहले से बनी मुख्य सड़क का ही उपयोग करते हुए नई सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि स्थानीय आबादी को अधिक लाभ मिल सके। उनका आरोप है कि वर्तमान योजना से स्थानीय लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा, जबकि बाहरी क्षेत्रों को अधिक फायदा होगा। ग्रामीणों ने राज्य सरकार, स्थानीय विधायक/ सांसद और पाकुड़ जिला प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण की योजना पर पुनर्विचार किया जाए और स्थानीय जनहित को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि परियोजना के क्रियान्वयन में जमीनी हकीकत और लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए, ताकि क्षेत्र की विकास सम्बन्धी उम्मीदें बरकरार रह सके। विरोध प्रदर्शन के दौरान जलालुद्दीन शेख उर्फ नुरु मोहम्मद, बासिर शेख, मो. बरीकुल आलम, हसनात शेख, जहांगीर आलाम, बैदुल शेख, जुलहास शेख, मोसरफ शेख, राजीबूल शेख, मतिउर शेख व सफिउर शेख आदि समेत काफी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे।



