
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
रामपुरा (जालौन)। वट सावित्री व्रत एवं अमावस्या के पावन अवसर पर शनिवार को नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। सुबह से ही सुहागिन महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर मंदिरों और वट वृक्षों के समीप पहुंचीं, जहां उन्होंने विधि-विधान एवं श्रद्धाभाव के साथ पूजा-अर्चना कर पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य की कामना की।
महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा की तथा वट सावित्री व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया। पूजा स्थलों पर मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और धार्मिक गीतों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा कर एक-दूसरे को व्रत की शुभकामनाएं दीं और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत माता सावित्री के अटूट पतिव्रत, तप और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, निष्ठा और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और पति की लंबी आयु के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। सनातन परंपरा में वट वृक्ष को त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना गया है। इसकी जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास बताया गया है। इसी कारण वट वृक्ष की पूजा को विशेष पुण्यदायी माना जाता है। महिलाओं ने व्रत के दौरान संयम, श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा कर परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना की। नगर के प्रमुख मंदिरों एवं वट वृक्ष स्थलों पर सुबह से ही महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद वितरण किया गया। पूरे नगर में धार्मिक उल्लास, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।


