जालौन

माधौगढ़ मेले की अव्यवस्थाओं पर अब भी कार्रवाई नहीं

सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर बढ़ी चिंता

 महिलाओं की सुरक्षा, ट्रैफिक जाम, विद्युत खतरे और खाद्य मानकों की अनदेखी पर प्रशासन मौन
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
माधौगढ़ (जालौन)। मेले को लेकर लगातार शिकायतें और सवाल उठने के बाबजूद अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। सोशल मीडिया पर कथित जुए और अव्यवस्थाओं से जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि मेले में प्रतिदिन देर रात तक भारी भीड़ उमड़ रही है। बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां और परिवार मेले में पहुंच रहे हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था नाममात्र की दिखाई देती है। लोगों का आरोप है कि मेले में पर्याप्त पुलिस बल, महिला सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन नियंत्रण व्यवस्था नहीं होने से किसी भी समय अप्रिय घटना होने की आशंका बनी रहती है।
मुख्य मार्ग पर घंटों जाम जैसी स्थिति
स्थानीय नागरिकों के अनुसार शाम होते ही मेले के आसपास मुख्य मार्ग पर चार पहिया और दो पहिया वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। सड़क किनारे अव्यवस्थित पार्किंग और भीड़ के कारण ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। कई बार एंबुलेंस और जरूरी वाहनों के निकलने में भी परेशानी होने की बात कही जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि अचानक कोई दुर्घटना, आगजनी या भगदड़ जैसी स्थिति बन जाए, तो मौके पर राहत एवं बचाव कार्य करना मुश्किल हो सकता है।
बिजली व्यवस्था को लेकर बड़ा खतरा
मेले में अस्थायी रूप से डाली गई विद्युत लाइनें भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खुले तार, बिना सुरक्षा कवर के कनेक्शन और पानी के समीप बिजली के उपयोग से हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है। गर्मी और भीड़ के बीच विद्युत शॉर्ट सर्किट या करंट फैलने जैसी घटनाएं कभी भी गंभीर रूप ले सकती हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन में विद्युत सुरक्षा मानकों, निरीक्षण और विभागीय अनुमति की पारदर्शिता भी सवालों के घेरे में है। झूलों में लाइट लगी होने से खतरा होने की सम्भावना से इनकार नही किया जा सकता।
खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल
मेले में बिक रहे खान-पान के सामान को लेकर भी लोगों ने चिंता व्यक्त की है। आरोप है कि खुले में रखे खाद्य पदार्थ, बर्फ, पेय पदार्थ और अन्य खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता की कोई निगरानी नहीं हो रही है। भीषण गर्मी के मौसम में खराब या मिलावटी खाद्य सामग्री से लोगों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा नियमित जांच और लाइसेंस सत्यापन आवश्यक है, लेकिन मेले में अधिकांश दुकानें बिना किसी स्पष्ट मानक या लाइसेंस व्यवस्था के संचालित होती दिखाई दे रही हैं।
दुकानों के लाइसेंस और अनुमति पर उठे सवाल
नियमों के अनुसार सार्वजनिक मेलों और अस्थायी बाजारों में व्यापारिक गतिविधियों के लिए अनुमति और कई मामलों में लाइसेंस आवश्यक होते हैं। बावजूद इसके स्थानीय नागरिक आरोप लगा रहे हैं कि मेले में बड़ी संख्या में दुकानें बिना पर्याप्त सत्यापन और मानकों के संचालित हो रही हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन को मेले की अनुमति प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था, खाद्य लाइसेंस, विद्युत निरीक्षण और कथित अवैध गतिविधियों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
“कार्रवाई कब?” बना सबसे बड़ा सवाल
क्षेत्र में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि लगातार शिकायतों, वायरल वीडियो और सार्वजनिक चिंताओं के बाबजूद प्रशासन आखिर कार्रवाई कब करेगा। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, विद्युत सुरक्षा विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग से तत्काल निरीक्षण अभियान चलाने तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button