
नई दिल्ली । अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 29 जुलाई 2024 को महिलाओं के आरक्षण के समर्थन में जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान अलका लांबा ने पुलिस कार्रवाई में बाधा पहुंचाई और सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध किया था।
दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को कांग्रेस नेता अलका लांबा को 2024 में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में दोषी करार दिया। अदालत ने सजा परबहस के लिए 5 जून की तारीख तय की है। मामले में विस्तृत आदेश का इंतजार है। हालांकि अगर कोर्ट ने दो साल तक की सजा सुनाई तो वो छह साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो सकती हैं।
जंतर-मंतर में लांबा ने पहुंचाई थी बाधा-अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 29 जुलाई 2024 को महिलाओं के आरक्षण के समर्थन में जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान अलका लांबा ने पुलिस कार्रवाई में बाधा पहुंचाई और सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध किया था।
पिछले साल दिसंबर में तय हुए थे आरोप-इस मामले में पिछले साल दिसंबर में मजिस्ट्रेट अदालत ने अलका लांबा के खिलाफ सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए बल प्रयोग, सरकारी कार्य में बाधा डालने, लोक सेवक के आदेश की अवहेलना करने और सार्वजनिक मार्ग में अवरोध पैदा करने जैसी धाराओं में आरोप तय करने के आदेश दिए थे।
अलका लांबा ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, लेकिन 6 फरवरी को अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।



