बागपत
संस्कार शिविर में बेटियों को मिला चरित्र निर्माण और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत। आर्य प्रतिनिधि सभा बागपत के तत्वावधान में चौधरी केहर सिंह दिव्य पब्लिक स्कूल, बड़ौत में आयोजित आवासीय संस्कार शिविर के चौथे दिन छात्राओं को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए। शिविर में वक्ताओं ने बेटियों के सर्वांगीण विकास, चरित्र निर्माण तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत योग, प्रार्थना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। इसके बाद शिक्षिका जया तिवारी ने छात्राओं को भाला चलाने का प्रशिक्षण दिया तथा आत्मरक्षा के विभिन्न व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बेटियों को शिक्षा के साथ-साथ आत्मरक्षा में भी दक्ष होना आवश्यक है, जिससे वे हर परिस्थिति का साहसपूर्वक सामना कर सकें।
शिविर के प्राचार्य अरविंद शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि बेटियों के जीवन में अनेक प्रकार के संघर्ष आते हैं, इसलिए उनका चरित्र, आत्मविश्वास और संस्कार मजबूत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्राएं अच्छे जीवन का संकल्प लेकर समाज और राष्ट्र के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि केवल बाहरी सफलता ही नहीं, बल्कि उच्च चरित्र ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान होती है।
वरिष्ठ समाजसेवी ओमवीर तोमर ‘नेताजी’ ने कहा कि आर्य समाज की शिक्षाएं राष्ट्र उत्थान की आधारशिला हैं। उन्होंने बताया कि देश की स्वतंत्रता के आंदोलन में महर्षि दयानंद सरस्वती के शिष्यों और आर्य समाज के कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आर्य समाज सदैव समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वासों और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाने का कार्य करता रहा है।
आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री रवि शास्त्री ने कहा कि व्यक्ति को धार्मिक बनना चाहिए, धर्मान्ध नहीं। उन्होंने छात्राओं को संदेश देते हुए कहा कि चित्र नहीं, चरित्र की पूजा करनी चाहिए और व्यक्ति नहीं, उसके व्यक्तित्व का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी के चरण स्पर्श करने से पहले उसके आचरण को देखना चाहिए, क्योंकि श्रेष्ठ आचरण ही सच्ची महानता का परिचायक है।
मुंबई से आए आर्यवीर अरुण आर्य ने कहा कि समाज में बढ़ रही अश्लीलता, पाश्चात्य अंधानुकरण और नैतिक पतन जैसी समस्याओं का प्रभावी समाधान संस्कार शिविरों के माध्यम से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविरों में छात्राओं को भारतीय संस्कृति, वैदिक विचारधारा और आदर्श जीवन शैली का ज्ञान प्राप्त होता है, जो उन्हें जीवन में सही दिशा प्रदान करता है।
शिविर में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया और वैदिक संस्कारों, अनुशासन तथा राष्ट्रभक्ति से जुड़े विषयों की जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर डॉ. मनीष तोमर, रामपाल तोमर, धर्मपाल त्यागी, प्रो. सुरेंद्र पाल आर्य, सविता आर्या, कपिल आर्य, ऋषिपाल आर्य सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने समाज में नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।



