गाजियाबाद

ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में लोनी के दस्तावेज लेखक और अधिवक्ता एकजुट

मुख्यमंत्री से आदेश वापस लेने की मांग

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी, गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश सरकार के निबंधन विभाग द्वारा लागू की जा रही नई ई-पंजीकरण व्यवस्था के खिलाफ प्रदेशभर के दस्तावेज लेखकों, अधिवक्ताओं, स्टाम्प विक्रेताओं और पंजीकरण कार्य से जुड़े अन्य लोगों में आक्रोश व्याप्त है उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक एसोसिएशन (पंजीकृत), तहसील लोनी के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित अपना ज्ञापन उपजिलाधिकारी लोनी को सौंपकर इस आदेश को शीघ्र निरस्त करने की मांग है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश शर्मा और सचिव हाजी सरफराज अहमद ने बताया कि निबंधन विभाग द्वारा जारी पत्रांक संख्या 2523/ई-पंजीकरण/शि०का०लख०/2026 दिनांक 04 जून 2026 के तहत ई-पंजीकरण प्रक्रिया में निजी संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना है कि इस निर्णय से वर्षों से पंजीकरण कार्य से जुड़े दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता, स्टाम्प विक्रेता, कंप्यूटर ऑपरेटर और मुंशी जैसे हजारों-लाखों लोगों के सामने रोजगार छीनने के साथ साथ भरण पोषण का भी संकट खड़ा हो जाएगा
बार एसोसिएशन लोनी के पदाधिकारियों का कहना है कि निजी संस्थाओं को पंजीकरण प्रक्रिया सौंपने से आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा । उनका कहना है कि निजी एजेंसियों के माध्यम से रजिस्ट्री और अन्य पंजीकरण सेवाओं से कार्य की लागत बढ़ सकती है, जिसका सीधा आर्थिक असर जनता पर पड़ेगा। इसके अलावा उन्होंने दस्तावेजों की गोपनीयता और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि संवेदनशील दस्तावेजों का संचालन निजी संस्थाओं के माध्यम से होने पर सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी प्रश्न भी खड़े हो सकते हैं।
पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण और तकनीकी रूप से कम जागरूक लोगों पर पड़ेगा। ऑनलाइन और निजी तंत्र के कारण उन्हें पंजीकरण संबंधी कार्यों में अनेकों कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुभाष, उपाध्यक्ष यूसुफ राणा, सहसचिव रतिराम, कोषाध्यक्ष नरेंद्र सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि  जनहित, रोजगार सुरक्षा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए सरकार को इस आदेश को वापस लेकर पूर्ववत पंजीकरण व्यवस्था बहाल करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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