अंतरराष्ट्रीय

पाकिस्तान-तुर्किये की दोस्ती

व्यापार के साथ रक्षा संबंध बढ़ाने पर फोकस, क्या भारत के लिए खतरा है ये गठजोड़?

इस्लामाबाद। क्या पाकिस्तान और तुर्किये का यह नया रक्षा और आर्थिक गठजोड़ दोनों देशों की डूबती अर्थव्यवस्थाओं के लिए संजीवनी साबित हो पाएगा? प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति एर्दोगन ने 5 अरब डॉलर का व्यापारिक लक्ष्य तय किया है। दोनों देश क्या इसे तय समय पर पूरा कर पाएंगे?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तुर्किये के प्रति अपने देश के अटूट समर्थन को एक बार फिर दोहराया है। उन्होंने साफ कहा कि अंकारा की सफलता और इस्लामाबाद की प्रगति एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। शनिवार को इस्तांबुल में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शरीफ ने तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन को द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने का भरोसा दिलाया। वहीं, राष्ट्रपति एर्दोगन ने दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को आर्थिक संबंधों की आधारशिला बताया। शहबाज शरीफ ने कहा, ‘तुर्किये की सफलता ही पाकिस्तान की सफलता है और पाकिस्तान की तरक्की ही तुर्किये की तरक्की है।’
क्या है एर्दोगन का नया प्लान?
तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी एक पोस्ट में कहा, ‘रक्षा उद्योग में हमारा सहयोग, जो हमारे आर्थिक संबंधों के सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है, नए प्रोजेक्ट्स के साथ दिन-ब-दिन विकसित हो रहा है।’ इसके साथ ही उन्होंने तुर्किये के निवेशकों को पाकिस्तान में अपनी व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। एर्दोगन ने यह भी स्पष्ट किया कि वे ऊर्जा, परिवहन, महत्वपूर्ण खनिजों और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में पाकिस्तान के साथ अपने सहयोग को और गहरा करना चाहते हैं।
क्या 5 अरब डॉलर का व्यापारिक लक्ष्य होगा पूरा?
इस्लामाबाद और अंकारा ने अपने आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर करने की प्रतिबद्धता जताई है। तुर्किये के विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 1.3 अरब डॉलर था। इस व्यापारिक अंतर को पाटने के लिए दोनों देशों के संबंधित मंत्रालय कराची में एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (स्पेशल इकोनॉमिक जोन) बनाने पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि ‘पाकिस्तान-तुर्किये बिजनेस कॉन्फ्रेंस’ ने उनके इस विश्वास को और मजबूत किया है कि दोनों देशों के आर्थिक संबंध अब एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं।
रक्षा क्षेत्र पर महा-फोकस: राष्ट्रपति एर्दोगन ने नए रक्षा प्रोजेक्ट्स को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों की असली रीढ़ करार दिया है।
कराची में बनेगा स्पेशल जोन: व्यापारिक और औद्योगिक सहयोग को जमीन पर उतारने के लिए कराची में एक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने की तैयारी चल रही है।
अरबों डॉलर का तुर्किये निवेश: पाकिस्तान में तुर्किये का कुल निवेश लगभग 2 अरब डॉलर है, और तुर्किये कंपनियों ने वहां 3.5 अरब डॉलर के 72 प्रोजेक्ट्स हाथ में लिए हैं।
इस्लामाबाद समझौते की तारीफ: एर्दोगन ने पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों के लिए पाकिस्तान की सराहना करते हुए कहा कि इस समझौते से दुनिया ने राहत की सांस ली है।
भारत पर क्या असर?
सीधे शब्दों में कहें तो पाकिस्तान और तुर्किये की यह दोस्ती भारत के लिए एक नया सिरदर्द है, क्योंकि तुर्किये के पास खतरनाक सैन्य ड्रोन और मिसाइल तकनीक है, जो वह पाकिस्तान को दे रहा है। इसके अलावा तुर्किये का राष्ट्रपति एर्दोगन हमेशा कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देता है। लेकिन भारत भी चुप नहीं बैठा है; भारत ने तुर्किये के जानी-दुश्मनों (जैसे आर्मेनिया और ग्रीस) से दोस्ती कर ली है और आर्मेनिया को तो भारत खुलकर अपने घातक हथियार बेच रहा है। यानी अगर तुर्किये पाकिस्तान के जरिए भारत को परेशान करेगा, तो भारत ने भी तुर्किये के पड़ोस में उसे घेरने का पूरा इंतजाम कर दिया है।

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