धनबाद

राष्ट्रीय संपत्ति कोयला की चोरी में DGMS कि लापरवाही – विजय कुमार झा।

BCCL क्षेत्रों में अरबों के कोयला चोरी का अनुमान; सूचना अधिकार अधिनियम से CISF की ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद उठे कई बड़े सवाल। 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
धनबाद। कतरास रानीबाजार स्थित आवासीय कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के क्षेत्र 1 से 12 तक में बड़े पैमाने पर हो रहे कोयला घोटाले को लेकर गंभीर दावे किए गए हैं। प्रेस वार्ता में कहा गया कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) द्वारा बीते 16 महीनों (1 जनवरी 2025 से 30 अप्रैल 2026) के भीतर की गई छापेमारी से यह साफ आकलन हो रहा है कि बीसीसीएल क्षेत्र में अरबों रुपए के कोयले की अवैध निकासी और चोरी हुई है।
प्रेस वार्ता में इस पूरी अवैध गतिविधि के लिए सीधे तौर पर महानिदेशालय खान सुरक्षा (DGMS) को जिम्मेदार ठहराया गया। श्री झा ने कहा कि खनन चाहे वैध हो या अवैध, किसी भी प्रकार के असुरक्षित और गैर-कानूनी खनन कार्य को रोकना प्राथमिक रूप से DGMS की ही जिम्मेदारी है।
 दो दिनों में CISF ने पकड़ा लाखों का अवैध कोयला 
एक तरफ जहाँ अरबों के घोटाले का आरोप लग रहा है, वहीं दूसरी ओर CISF (केऔसुब) इकाई बीसीसीएल धनबाद द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति इस बात की पुष्टि करती है कि क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन किस कदर हावी है। CISF द्वारा जारी दो दिनों के हालिया आंकड़े निम्नलिखित हैं:
 7 जुलाई 2026: खुफिया और विश्वसनीय सूचनाओं के आधार पर विभिन्न स्थानों पर सघन अभियान चलाकर लगभग 132.370 टन अवैध रूप से संग्रहित कोयला बरामद किया गया। इसकी अनुमानित कीमत ₹10,58,960/- आंकी गई है।
 8 जुलाई 2026: लगातार दूसरे दिन चलाए गए अभियान में **149.52 टन** अवैध कोयला जब्त किया गया, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत ₹11,96,160/- है।
कानूनी कार्रवाई और जब्ती
CISF प्रबंधन के अनुसार, इन दोनों मामलों में MMDR Act, 1957 (खान और खनिज विकास और विनियमन अधिनियम) तथा अन्य प्रासंगिक विधिक प्रावधानों के तहत संबंधित थानों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जब्त किए गए कोयले को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत बीसीसीएल प्रबंधन को सुपुर्द किया जा रहा है।
> “CISF इकाई, बीसीसीएल धनबाद राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा और अवैध खनन, चोरी, अवैध भंडारण व परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। भविष्य में भी ऐसे अभियान और अधिक आक्रामक तरीके से जारी रहेंगे।”
CISF > बड़ा सवाल: पहले चुप्पी, तो अब अचानक तत्परता क्यों?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा नीतिगत और प्रशासनिक सवाल स्थानीय स्तर पर उठ रहा है। साल 2022 से ही विभिन्न समाचार पत्रों, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय ग्रामीण व समाजसेवी लगातार सबूतों और सूचनाओं के साथ इस अवैध कोयला कारोबार का विरोध कर रहे थे।
ऐसे में जनमानस में यह सवाल तैर रहा है कि जब शिकायतें सालों से हो रही थीं, तो उस वक्त बीसीसीएल प्रशासन, स्थानीय पुलिस और सीआईएसएफ ने ऐसी निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं की? वर्तमान समय में अचानक दिखाई जा रही इस तत्परता के पीछे की टाइमिंग को लेकर अब क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं गर्म हैं। क्या यह महज़ दिखावटी कार्रवाई है या वाकई में सिंडिकेट की कमर तोड़ने की शुरुआत, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। मौके पर वरिष्ठ राजनीतिक विशेषज्ञ उदय सिंह भी मौजूद थे।
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