
पात्र होने का दावा, फिर भी नहीं मिली विधवा पेंशन; पंचायत के चक्कर काटने को मजबूर बुजुर्ग महिला
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली । जिले के जनपद पंचायत देवसर अंतर्गत ग्राम पंचायत गन्नई में सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। गांव की 69 वर्षीय आदिवासी विधवा नानबाई अगरिया ने आरोप लगाया है कि वह पिछले तीन वर्षों से विधवा पेंशन के लिए पंचायत कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन आज तक उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिल सका। लगातार आवेदन और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद उनका नाम पेंशन सूची में शामिल नहीं किया गया।
पीड़ित महिला का कहना है कि उन्होंने कई बार पंचायत में आवेदन देकर अपनी स्थिति से अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। आर्थिक रूप से कमजोर नानबाई आज भी कच्चे खपरैल के मकान में रहने को मजबूर हैं। उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें जीवन-यापन के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जबकि शासन की योजनाओं का लाभ उन्हें संबल दे सकता था। परिजनों का आरोप है कि नानबाई अगरिया पात्र हितग्राही होने के बावजूद केवल विधवा पेंशन ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी समय पर नहीं पा सकी हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते पेंशन स्वीकृत हो जाती तो बुजुर्ग महिला को आर्थिक सहायता मिलती और उनकी रोजमर्रा की परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती थीं। मामले ने शासन के उन दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें प्रत्येक पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात कही जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है, तो एक पात्र बुजुर्ग महिला को वर्षों तक कार्यालयों के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं। इस बीच नानबाई अगरिया ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को लेकर भी गंभीर शिकायत की है। उनका कहना है कि उनके साथ उनके पांच बेटे रहते हैं, लेकिन पूरे परिवार के नाम पर उन्हें केवल 5 किलोग्राम राशन ही मिल रहा है। उनका दावा है कि पहले अधिक खाद्यान्न मिलता था, लेकिन अब बिना किसी जानकारी के राशन कम हो गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि परिवार के अन्य सदस्यों का नाम राशन सूची से क्यों हट गया। ग्रामीणों और परिजनों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर नानबाई अगरिया की पात्रता के अनुसार शीघ्र विधवा पेंशन स्वीकृत करने, राशन संबंधी शिकायत का निराकरण कराने तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और बुजुर्ग आदिवासी महिला को न्याय कब तक मिल पाता है।



