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एफसीआरए पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी को भारत ने किया खारिज

विदेश मंत्रालय ने कहा- यह हमारा आंतरिक मामला

नई दिल्ली । भारत ने एफसीआरए संशोधन विधेयक पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी को सख्ती से खारिज करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है। इस पर फैसला भारत की संसद करेगी। विदेश मंत्रालय ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका समेत कई देश विदेशी फंड के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। साथ ही भारत ने समुद्री सुरक्षा और बांग्लादेश से जुड़े सवालों पर भी अपना पक्ष साफ किया। आइए, विस्तार से जानते हैं कि सरकार ने इन मामलों पर क्या-कुछ कहा?
भारत ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी का स्पष्ट और दो टूक जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के विधायी मामलों पर फैसला देश की संसद करती है और यह पूरी तरह भारत का आंतरिक विषय है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि विदेशी फंड के प्रवाह को नियंत्रित करने के नियम केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका समेत कई देशों में लागू हैं।
एफसीआरए पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार ने एफसीआरए संशोधन विधेयक पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी देखी है। उन्होंने कहा कि भारत से जुड़े विधायी मामलों पर निर्णय संसद लेती है और इस तरह के विषय देश के आंतरिक मामलों का हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई देश, जिनमें अमेरिका भी शामिल है, विदेशी धन के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए अपने-अपने कानून लागू करते हैं।
समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत ने क्या कहा?
भारत ने पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय मिशन लगातार जहाजरानी मंत्रालय, समुद्री प्राधिकरणों और स्थानीय एजेंसियों के संपर्क में हैं ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीय नाविकों और भारतीय ध्वज वाले जहाजों को तुरंत सहायता मिल सके। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही तथा व्यापार जारी रहना चाहिए।
भारतीय नाविकों के लिए सरकार ने क्या व्यवस्था की है?
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय मिशन कई महीनों से 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन संचालित कर रहे हैं। इसके तहत केवल नाविक ही नहीं, बल्कि जरूरतमंद अन्य भारतीय नागरिक भी सहायता ले सकते हैं।
आखिर क्या है ऋउफअ? जिस पर अमेरिका को भी हो रही आपत्ति
देश
खाड़ी क्षेत्र में भारतीय मिशन लगातार स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं।
24़7 हेल्पलाइन कई महीनों से संचालित की जा रही है।
भारतीय ध्वज वाले जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
भारत ने सभी पक्षों से नागरिकों, व्यावसायिक जहाजों और समुद्री कर्मियों को निशाना न बनाने की अपील की।
अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध व्यापार जारी रखने पर जोर दिया गया।
शेख हसीना के कार्यक्रम पर सरकार ने क्या कहा?
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 5 अगस्त को हुए मीडिया कार्यक्रम पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह एक निजी मीडिया संस्थान का कार्यक्रम था। सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं थी। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मंच पर कही गई बातों, विशेष रूप से बांग्लादेश की विधिवत गठित सरकार से जुड़े बयानों का भारत सरकार समर्थन नहीं करती।
भारत ने अमेरिका का उदाहरण क्यों दिया?
एफसीआरए पर अपनी बात रखते हुए विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले कानून किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। मंत्रालय ने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी विदेशी धन के प्रवाह पर नियमन लागू है। इस बयान के जरिए भारत ने संकेत दिया कि ऐसे कानून राष्ट्रीय हित और नियामक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा हैं।

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