गाजियाबाद
लोनी का रेड फ्लेम होटल प्रकरण चर्चाओं में
विधायक की शिकायत के बाद भी कार्रवाई ना किए जाने पर उठे सवाल
विधायक के आरोपों के बाद मौके पर पहुंची पुलिस, प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होने के बाद लोगों को वहां से जाने की सलाह देने का आरोप
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र स्थित रेड फ्लेम होटल में कथित विवाद का मामला अब लोनी क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय विधायक द्वारा होटल में मौजूद कुछ लोगों पर पुलिस वार्ता के दौरान होटल संचालक को धमकाने तथा एक युवक के साथ मारपीट किए जाने के आरोप लगाए जाने के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि विधायक द्वारा मामले की शिकायत किए जाने के बाद होटल के समीप स्थित पुलिस चौकी से पुलिस बल मौके पर पहुंचा। उस समय होटल में सर्व समाज के लोगों की प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी। आरोप है कि पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त होने के बाद मौके पर मौजूद लोगों को वहां से चले जाने की सलाह दी।
इसी दौरान जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नेता और पत्रकार बाहर निकलने लगे तो लोनी बॉर्डर थाना प्रभारी भी मौके पर पहुंच गए। बताया जाता है कि इस दौरान थाना प्रभारी और मौके पर मौजूद पत्रकारों तथा सर्व समाज के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। आरोप है कि पुलिस द्वारा मौके पर मौजूद लोगों पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया।
विधायक के आरोप सही तो फिर कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि विधायक द्वारा लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही थे और पुलिस के सामने ही होटल में मौजूद लोगों द्वारा धमकी या मारपीट की घटना हुई थी, तो पुलिस ने मौके पर मौजूद आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की? शिकायत के बाद पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद लोगों से पूछताछ अथवा हिरासत में लेकर मामले की जांच करने के बजाय उन्हें वहां से जाने की सलाह क्यों दी, क्षेत्र में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
वहीं दूसरी ओर, यदि मौके पर मौजूद लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं थे तो पुलिस को पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इससे यह भी साफ हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ।
पुलिस की निष्पक्षता पर उठ रहे हैं सवाल
घटना को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक हैं। लोगों का कहना है कि जब मामले में सत्ताधारी दल के स्थानीय विधायक की शिकायत सामने आई थी, तब पुलिस को शिकायत को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार जांच करनी चाहिए थी। यदि विधायक की शिकायत के बावजूद पुलिस तत्काल कार्रवाई नहीं करती है तो आम नागरिकों की शिकायतों की सुनवाई और कार्रवाई को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि पूरे मामले में कौन सही है और कौन गलत, इसका अंतिम निर्णय पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकता है। मौके पर मौजूद लोगों के बयान, होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों से घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
मामला संवेदनशील, इसलिए निष्पक्ष जांच जरूरी
रेड फ्लेम होटल प्रकरण में सर्व समाज के लोगों की मौजूदगी और दोनों पक्षों के बीच हुई कथित नोकझोंक को देखते हुए मामला सामाजिक दृष्टि से भी संवेदनशील माना जा रहा है। ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह किसी भी पक्ष के दबाव में आए बिना निष्पक्ष कार्रवाई करे, ताकि घटना को लेकर किसी प्रकार का भ्रम, तनाव या आपसी मनमुटाव पैदा न हो।
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि पुलिस मौके पर मौजूद लोगों और शिकायतकर्ता के आरोपों की निष्पक्षता से जांच करती है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि विवाद की वास्तविक कारण क्या था और पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल कितने सही हैं।
