आज बारूद के ढेर पर बैठी दुनिया के लिए गांधी के विचार सर्वाधिक प्रासंगिक
Today, Gandhi's ideas are most relevant for a world sitting on a powder keg.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
धनबाद। आज बारूद और अणु बमों की ढेर पर बैठे विश्व को यदि यदि कोई बचा सकता है तो वह महात्मा गांधी का सत्य और अहिंसा के प्रति संकल्प और आग्रह ही है। बारूद के ढेर पर बैठी दुनिया के लिए गांधी जी के विचार सर्वाधिक प्रासंगिक है। अपनी 157 जयंती के अवसर पर बापू न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व की मानव जाति की रक्षा के लिए अपने विचारों की जलती मशाल लिए दुनिया की राह को रोशन कर रहे हैं। भारत के पूरे स्वाधीनता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी अपने अहिंसा के सिद्धांत से कभी विचलित नहीं हुए वह र्निविवादित रूप से धर्म में आस्था रखने वाले एक आस्तिक व्यक्ति थे पर दुनिया के किसी भी धर्म या संप्रदाय से उनका विरोध नहीं था सबके लिए उनके मन में समान आदर व सम्मान का भाव था। उनका प्रिय भजन “ईश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान” आज भारत की 140 करोड की मानव जाति के साथ-साथ पूरी विश्व मानवता को यह मिशाल दिखा रहा है कि-‘कम से कम मानव जाति की रक्षा के लिए तो सनमती और सद्बुद्धि से काम लो’।
*महात्मा गांधी को अपनी श्रद्धा निवेदित करते हुए जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ मृणाल ने कहा कि आज जनवादी लेखक संघ के तत्वाधान में भारतीय क्लब में आयोजित श्रद्धांजलि सभा सह संगोष्ठी कार्यक्रम में महात्मा गांधी एवं भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया और एकता के कलाकारों ने गांधी जी के प्रिय भजन ईश्वर “अल्लाह तेरो नाम”।तथा “वैष्णो जन तो तेने कहिए,जो पीर पराई जाणे रे”। प्रस्तुत कर लोगों को भाव विभोर कर दिया।
आज कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि महादेव चटर्जी तथा संचालन राजेंद्र राजा ने किया महादेव चटर्जी राजेंद्र प्रसाद राजा, सुदाम गिरी,नवदीप गुप्ता,प्रभात मिश्रा,राजीव रंजन मिश्रा, जयदेव बनर्जी, उमेश ऋषि, नासिर खां, विष्णु कुमार, बाबु वर्मन, संतोष दास एवं अन्य।धन्यवाद ज्ञापन विनय कुमार सिंह ने किया।


