गाजियाबाद
खड़खड़ी अंडरपास के पास जीडीए की कार्रवाई पर क्यों उठ रहे हैं सवाल
गणमान्य लोगो पर लाखों की वसूली के आरोप

चुनिंदा निर्माणों पर बुलडोजर चलाने को लेकर अधिकारी सवालों के घेरे में, उच्चस्तरीय जांच की मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी (गाजियाबाद)। खड़खड़ी अंडरपास के निकट गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की ओर से की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई विवादों में घिरती नजर आ रही है। लोनी क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों के विस्तार और निर्माण कार्यों को लेकर पहले से ही कुछ प्रमुख लोगों पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में कुछ स्थानों पर ही कार्रवाई किए जाने के बाद स्थानीय लोगों ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, कार्रवाई की आड़ में लाखों रुपये की कथित अवैध वसूली किए जाने के गंभीर आरोपों की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर भी हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में कई स्थानों पर कथित तौर पर अवैध कॉलोनियों का विकास और निर्माण कार्य जारी है। इसके बावजूद जीडीए की कार्रवाई कुछ चुनिंदा निर्माणों तक सीमित दिखाई देती है। खड़खड़ी अंडरपास के पास हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि निर्माण अवैध थे तो आसपास की अन्य कॉलोनियों और निर्माणों के खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कार्रवाई से पहले कुछ गणमान्य लोगो पर रकम मांगने का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले और बाद में कुछ गणमान्य लोगों ने इस काम को संरक्षण देने के नाम पर मोटी रकम की मांग की गई। आरोप है कि कार्रवाई का भय दिखाकर कथित रूप से लाखों रुपये की वसूली की गई और जो लोग रकम देने में असमर्थ रहे, उनके निर्माण कार्यों को निशाना बनाया गया। मामले में दो स्थानीय नेताओं की भूमिका को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म हैं।
अवैध कॉलोनियों पर समान रूप से हो कार्रवाई , जोरशोर से उठी मांग
स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि क्षेत्र में अवैध निर्माण हो रहे हैं तो प्राधिकरण को नियमों के अनुसार सभी संबंधित स्थानों पर समान रूप से कार्रवाई करनी चाहिए। लोगों ने आरोपों के आधार पर कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए शासन और संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि अवैध कॉलोनियों के निर्माण पर रोक लगाने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। ऐसे में कार्रवाई की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी व्यक्ति को पक्षपात या कथित अवैध वसूली की शिकायत का अवसर न मिले।
पुलिस और जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत का दावा
सूत्रों के अनुसार, मामले से जुड़े शिकायतकर्ता ने कथित लेनदेन और धमकी भरे फोन कॉल का विवरण देते हुए लोनी बॉर्डर थाने, गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर शिकायत दर्ज कराने का दावा किया है। शिकायत में पूरे घटनाक्रम की तारीखवार जांच कराए जाने की मांग की गई है।
अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों की जांच और कार्रवाई पर लोगों की नजरें टिकी हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि, कथित लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की जांच और संबंधित पक्षों का बयान सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।




