शिक्षाहापुड़

हापुड़ जिले में कम छात्र संख्या वाले 90 स्कूलों का होगा समायोजन, शुरू किया सर्वे।

शिक्षक संगठन बोले, यह प्रक्रिया नहीं रुकी तो होगा आंदोलन।

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।

हापुड़। जिले में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में कम छात्र संख्या की समस्या को देखते हुए शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिले में ऐसे स्कूलों का सर्वे शुरू किया गया है, जहां नामांकित छात्रों की संख्या न्यूनतम स्तर 10 या उससे भी कम है । इस सर्वे के आधार पर कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को निकटवर्ती स्कूलों में समायोजित (मर्ज) करने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य शैक्षिक संसाधनों का बेहतर उपयोग, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना और शिक्षकों की तैनाती को संतुलित करना है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया जिले के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू की जाएगी। ब्लॉक स्तर पर गठित टीमें स्कूलों का दौरा कर रही हैं और वहां की स्थिति का आकलन कर रही हैं। सर्वे में स्कूलों में नामांकित छात्रों की संख्या, उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं, शिक्षकों की स्थिति और भौगोलिक दूरी जैसे कारकों को ध्यान में रखा जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिले में कई ऐसे स्कूल हैं जहां 10 से भी कम बच्चे पढ़ रहे हैं। ऐसे स्कूलों को चलाना न केवल आर्थिक रूप से बोझिल है, बल्कि यह बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता पर भी असर डालता है।

उत्तर प्रदेश सरकार की इस बेसिक शिक्षा के विद्यालयों के समायोजन प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संसाधन-केंद्रित बनाना है। कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में अक्सर शिक्षकों की कमी, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा और सीमित संसाधनों की समस्या देखी जाती है। ऐसे में इन स्कूलों को निकटवर्ती बेहतर सुविधाओं वाले स्कूलों में मर्ज करने से बच्चों को पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल के मैदान और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। साथ ही, शिक्षकों की तैनाती को भी तर्कसंगत बनाया जा सकेगा, जिससे शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार होगा।

इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों के समायोजन से पहले अभिभावकों की राय ली जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों को किसी तरह की असुविधा न हो। समायोजन के लिए निकटवर्ती स्कूलों का चयन इस तरह किया जाएगा कि बच्चों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े। इसके लिए परिवहन व्यवस्था को भी मजबूत करने पर विचार किया जा रहा है।

समायोजन प्रक्रिया के बाद उन स्कूलों के शिक्षकों का पुनर्विनियोजन भी किया जाएगा, जो मर्ज हो जाएंगे। शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि किसी भी शिक्षक की नौकरी पर असर न पड़े, बल्कि उनकी सेवाओं का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जाए। शिक्षकों को उन स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा जहां उनकी जरूरत अधिक है।
प्रक्रिया में पारदर्शिता पूरी पारदर्शिता रखी जाएगी ।

बेसिक शिक्षा अधिकारी ऋतु तोमर का कहना है कि , इस प्रक्रिया से न केवल संसाधनों का समेकन होगा, बल्कि बच्चों को बेहतर शैक्षिक वातावरण भी मिलेगा। उदाहरण के लिए, जिन स्कूलों में केवल एक या दो शिक्षक हैं और छात्र संख्या कम है, वहां पठन-पाठन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। समायोजन के बाद बच्चों को अधिक शिक्षकों के मार्गदर्शन में पढ़ने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी शैक्षिक प्रगति में सुधार होगा। समायोजन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी। सर्वे के बाद तैयार की गई सूची को सार्वजनिक किया जाएगा और अभिभावकों, शिक्षकों व स्थानीय समुदाय से फीडबैक लिया जाएगा। इसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button