सड़क पर घूमते गोवंश और लापरवाह ग्राम आटा सचिव
जिलाधिकारी के आदेशों की सचिव द्वारा उड़ाई जा रही धज्जियां

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो
जालौन : जनपद के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय द्वारा सड़क पर गोवंश के विचरण को लेकर बुधवार को सख्त निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों का उद्देश्य केवल आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही नहीं था बल्कि इन बेजुबान पशुओं को भी संरक्षित करना था जो अक्सर हाईवे जैसे व्यस्त मार्गों पर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। लेकिन ग्राम आटा की हकीकत इन आदेशों की असल तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। बुधवार को जिलाधिकारी ने जिले भर के खंड विकास अधिकारियों, नगर निकायों के अधिशाषी अधिकारियों और ग्राम सचिवों को निर्देश दिए थे कि कोई भी गोवंश सड़कों पर विचरण करता न दिखे। उन्होंने कहा कि सड़क पर पशुओं का घूमना न केवल आमजन के लिए खतरा है बल्कि ये प्रशासनिक विफलता को भी दर्शाता है। जिलाधिकारी ने यह भी कहा था कि अगर कहीं भी सड़क पर गोवंश दिखाई दिया तो सम्बन्धित के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी इन सख्त आदेशों के बावजूद झांसी-कानपुर हाईवे से सटे ग्राम आटा में हालात जस के तस बने हुए हैं। सड़क पर घूमते और बैठे गोवंश आम दृश्य बन चुके हैं। ग्राम आटा के सचिव पवन सोनी की लापरवाही स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। न तो वे सड़क पर दिख रहे गोवंशों को हटवा रहे हैं और न ही प्रशासनिक निर्देशों का पालन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सचिव को न तो जिलाधिकारी के आदेशों की परवाह है और न ही किसी कार्रवाई का भय। हाईवे जैसे संवेदनशील मार्ग पर गोवंश का विचरण दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है। इससे हाइवे पर निकलने वालों की सुरक्षा और जीवन दोनों खतरे में पड़ रहे हैं। जब कभी कभार सम्बंधित अधिकारियों द्वारा अखबारों में लगी खबरों एवं तस्वीरों की जानकारी के लिए सचिव से पूछा जाता है तो उनके द्वारा खबर और तस्वीर दोनों को झूठा साबित यह कहकर कर दिया जाता है तो वह हमेशा एक ही रट लगाते हैं – “यह तस्वीरें पुरानी हैं अब ऐसा कुछ नहीं हो रहा है।” सभी गोवंश गौ शालाओं में बंद है लेकिन यह बात अब ज्यादा दिन नहीं चलने वाली क्योंकि पत्रकारों ने भी अब तस्वीरें जिओ टैग तकनीक से लेना शुरू कर दिया है। इससे न केवल तस्वीरों का स्थान, दिनांक और समय रिकॉर्ड होता है बल्कि सचिव साहब जैसे झूठी सफाई भी बेनकाब होती है। जिओ टैग तस्वीरों में स्पष्ट रूप से गोवंश सड़क पर बैठे और चलते दिखाई दे रहे है। इन तस्वीरों की सच्चाई को अब कोई भी अधिकारी नकार नहीं सकता। इससे साफ है कि सचिव द्वारा दी गई सफाई केवल कार्यवाही से बचने का एक जरिया होता है। जिलाधिकारी द्वारा चलाया जा रहा ‘सड़क मुक्त गोवंश अभियान’ भी अब केवल कागजों तक सिमट कर रह गया है। न तो खंड विकास अधिकारी और न ही नगर निकाय के अधिशाषी अधिकारी इस अभियान को ज़मीन पर उतारने में गंभीरता दिखा रहे हैं। ग्राम आटा इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है जहां अभियान की स्थिति बेहद लचर है। जब ग्राम आटा के स्थानीय ग्रामीणों जानकारी ली गई तो उनका कहना है कि जब भी कोई बड़ा अधिकारी क्षेत्र में आने वाला होता है तभी गोवंशों को अस्थायी रूप से सड़कों से हटाया जाता है और उसके बाद फिर वही स्थिति बन जाती है। हाईवे पर अचानक सामने आ जाने वाले पशु अक्सर बड़े हादसों का कारण बनते हैं। इससे न केवल वाहन चालकों की जान को खतरा होता है बल्कि गोवंश भी घायल होते हैं या मर जाते हैं। ऐसे में सचिव और संबंधित अधिकारियों की यह लापरवाही सीधे तौर पर जनता की जान जोखिम में डालने वाली है। अब देखना यह है कि क्या जिलाधिकारी द्वारा लापरवाह सचिव पर कोई कार्यवाही की जाती है या सिर्फ खानापूर्ति कर के सचिव को बख्श दिया जाता है।




