समता, ममता करुणा और प्यार बौद्ध धम्म के आधार तत्व
देश में एक समान शिक्षा प्रणाली के पक्षधर थे बाबा साहब डॉ अम्बेडकर

स्कूलों को बंद करने का फैसला वापस ले योगी सरकार, प्राइवेट स्कूलों का राष्ट्रीयकरण जनहित में जरूरी
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो
अमेठी। पूरे इन्छा, भगवानपुर में निर्वाण प्राप्त गया प्रसाद की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। श्रद्धांजलि सभा में बौद्ध धम्म और बाबा साहब डॉ अम्बेडकर की शिक्षाओं पर संवाद हुआ। बौद्धाचार्य संघ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से परिषदीय विद्यालयों को मर्ज करने और बंद करने के फैसले को वापस लेने की मांग की और देश में एक समान शिक्षा प्रणाली लागू करते हुए प्राइवेट स्कूलों का राष्ट्रीयकरण करने और भविष्य में निजी विद्यालयों को मान्यता न देने की मांग की।
बोधगया स्थित महाबोधि विहार के पुराने प्रबंधन एक्ट को रद्द करते हुए महाबोधि विहार को बौद्धों के स्वामित्व में देने की मांग भी दोहराई गई।

बामसेफ के जिला संयोजक संजीव भारती ने कहा कि बौद्ध धम्म वैज्ञानिक धम्म है। यहां रुढ़िवाद , अन्धविश्वास और अवैज्ञानिक मान्यताओं को कोई स्थान नहीं है।त्रिसरण , पंचशील बौद्ध धम्म का मूल है। तथागत बुद्ध ने मध्यम् मार्ग का संदेश दिया है। बाबा साहब डॉ अम्बेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को 22 प्रतिज्ञाओं के साथ बौद्ध धम्म ग्रहण किया था। बौद्धों को अपने जीवन में इनका ध्यान रखते हुए आचरण करना चाहिए।
भारतीय बौद्ध महासभा रायबरेली के अध्यक्ष डॉ सुनील दत्त ने कहा कि जो धम्म मानव मानव में समानता की बात करता है, वही सद्धम्म है। बाबा साहब डॉ अम्बेडकर ने बौद्ध धम्म की सभी शिक्षाओं को भारतीय संविधान में समाहित किया है।
समता , ममता, करुणा और प्यार बौद्ध धम्म के आधार तत्व हैं।
कार्यक्रम का संचालन बौद्धाचार्य वैरागी राम भारती संजय कुमार शास्त्री और राम प्रताप ने किया। वरिष्ठ शिक्षक राम चन्द्र, इन्द्र पाल गौतम संजय कुमार राव,राम फल फौजी,राम प्रसाद, डॉ सुरेश कुमार राव, सुरेन्द्र कुमार, प्रमोद कुमार एडवोकेट, ललित कुमार,राम शिरोमणि, राजीव कुमार,कमला देवी, नेहा आदि ने निर्वाण प्राप्त गया प्रसाद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।



