बीसीसीएल आउटसोर्सिंग कम्पानियों में सेफ्टी पर सवाल
Questions on safety in BCCL outsourcing companies
नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
धनबाद। बीसीसीएल क्षेत्र में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनियों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार सवालों के घेरे में है। क्षेत्र में भूमि आउटसोर्सिंग, मां अंबे आउटसोर्सिंग और डेको आउटसोर्सिंग कंपनियां खनन कार्य कर रही हैं। इन पर निगरानी और सेफ्टी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सेफ्टी ऑफिसर संजय चौधरी पर है, लेकिन बार-बार हो रहे हादसों ने उनकी भूमिका को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जानकारी के अनुसार, डीजीएमएस के नियमों के तहत कंपनियों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। इसके लिए हर साल बीसीसीएल द्वारा सुरक्षा पखवाड़ा और सेमिनार भी आयोजित किए जाते हैं। बावजूद इसके, खदानों और परियोजनाओं में लापरवाही और अनियमितताओं का सिलसिला थम नहीं रहा है। स्थानीय लोगों और मजदूर संगठन का आरोप है कि सुरक्षा अधिकारी और प्रबंधन की लापरवाही के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर ऐसी लापरवाहियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती और जिम्मेदार अधिकारी बेफिक्र क्यों नजर आते हैं। डीजीएमएस (खान सुरक्षा महानिदेशालय) के निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बावजूद इसके समय-समय पर निरीक्षण करने वाले अधिकारी भी सुधार कराने में विफल हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि हादसे के बाद केवल खानापूर्ति न हो, बल्कि दोषी अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और एफ आर आई दर्ज की जाए। जियो और जीने दो” की भावना से ही क्षेत्र का विकास और अमन कायम है, जो शुक्रवार को घटना के तुरंत बाद कतरास थाना प्रभारी आसित कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और अपनी शांत व मृदुभाषी शैली से लोगों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बहाल करने में उनकी भूमिका की सराहना स्थानीय लोग और उच्च अधिकारी लगातार करते रहे हैं। “जियो और जीने दो” की भावना से ही क्षेत्र का विकास और अमन कायम रह सकता है।



