गाजियाबाद

लोनी में सफाई पर करोड़ों खर्च – कूड़े के ढेरों ने बताया 4.75 करोड़ का असली हाल!

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

लोनी। लगता है लोनी नगर पालिका परिषद ने सफाई व्यवस्था को “प्रीमियम प्लान” पर डाल दिया है – फर्क बस इतना है कि अब सफाई दिखती नहीं, सिर्फ कागज़ों पर लिखी जाती है। 2 करोड़ रुपये में सफाई बढ़िया थी, लेकिन 4 करोड़ 75 लाख रुपये के टेंडर में सफाई पूरी तरह ठप्प है। शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर ऐसे खड़े हैं मानो कोई प्रदर्शनी चल रही हो।

जनता का कहना है कि अब तो मच्छरों ने भी खुशी का जश्न मना लिया है। डेंगू, बुखार और सांस की बीमारियों ने दस्तक दे दी है। वार्डों में न सफाई कर्मचारी पहुंच रहे, न ट्रैक्टर-मशीनरी दिखाई देती है। पीड़ित सभासदों का कहना है कि ठेकेदार कंपनी तय संख्या में कर्मचारी भेज ही नहीं रही – शायद सफाई कर्मी भी “लापता” हो गए हैं।

एक नाराज़ नागरिक ने व्हाट्सएप ग्रुप पर तंज कसते,हुए लिखा कि “पहले 2 करोड़ में सफाई अच्छी थी, अब 4 करोड़ 75 लाख में सिर्फ कूड़ा ही कूड़ा दिखता है। लगता है बाकी का पैसा हवा में छिड़काव कर दिया गया है – वो भी मच्छरों पर नहीं, हमारी आंखों पर!”
नगर पालिका परिषद के सभासद अकुंश जैन मिकू,रामनिवास त्रिपाठी, सुमित अंजली मोहन शर्मा, अनिल चौधरी, रूपेंद्र चौधरी धर्मेंद्र कुमार अमित चौधरी लगातार पालिका बैठक में सफाई अव्यवस्था पर उंगली उठा रहे हैं लेकिन क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पटरी पर आने का नाम नहीं ले रही है आखिर क्यों?

लोगों का कहना है कि अधिकारियों को जनता याद सिर्फ चुनाव के समय आती है, उसके बाद जिम्मेदारी निभाने के बजाय कुर्सी संभालना ही असली काम समझा जाता है। सवाल यह है कि क्या यही है प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का स्वच्छ भारत अभियान? अगर हां, तो फिर लोनी का कूड़ा ही “भारत महान” का नया प्रतीक बन चुका है।

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