बागपत
शिक्षा और व्यापार का सफल संगम
जैन परिवार का संघर्ष और समर्पण – नेशनल प्रेस टाइम्स के प्रभारी से विशेष बातचीत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत : जैन परिवार के आधार स्तंभ अनुराग जैन जो गृह मंत्रालय मे कार्यरत हैं, उनसे बातचीत के मुख्य अंश:
प्रश्न 1 : शुरुआत कहाँ से और कैसे हुई?
अनुराग जैन (संस्थापक – सेंट आर.वी. कॉन्वेंट स्कूल): हमारी जड़ों की शुरुआत घट्टे बाज़ार, बड़ौत से हुई। वहाँ जैन मसाले के नाम से हमारी दुकान थी। धीरे-धीरे परिवार ने मेहनत और ईमानदारी से कारोबार बढ़ाया और शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा।
प्रश्न 2 : आज आपके पास कितने शैक्षिक संस्थान हैं?
अनुराग जैन : आज गर्व से कह सकता हूँ कि हमारे परिवार ने तीन स्कूल खड़े किए हैं –
1. सेंट आर.वी. कान्वेंट स्कूल बडौली
2. वनस्थली पब्लिक स्कूल, बड़ौत
3. सेंट आर.वी. कान्वेंट स्कूल, जीवाना (बागपत)
इन संस्थानों का मकसद केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि बच्चों को संस्कार, आत्मविश्वास और उज्जवल भविष्य की राह दिखाना है।
प्रश्न 3 : इन संस्थानों की देखरेख परिवार में किसके हाथों में है?
अनुराग जैन :
बडौली शाखा का संचालन मेरी पत्नी श्रीमती चारु जैन करती हैं।
जीवाना शाखा का संचालन मेरा पुत्र एडवोकेट प्रथम जैन करता है।
वनस्थली पब्लिक स्कूल का संचालन मेरे सबसे बड़े भाई संजय जैन एवं उनका पुत्र हर्षित जैन कर रहे हैं।
इसके अलावा HP का पेट्रोल पंप मेरे भाई मनोज जैन एवं उनका पुत्र यश जैन संभालते हैं, जबकि हमारी परचून की दुकान अब सर्राफा कारोबार में बदल चुकी है जिसे मेरे भाई अजय जैन, वैभव जैन एवं संभव जैन देख रहे हैं।
प्रश्न 4 : इतने विविध कारोबार और स्कूलों को एक साथ संभालना कठिन नहीं होता?
अनुराग जैन : कठिनाई तो हर काम में होती है, लेकिन परिवार का आपसी सहयोग हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हर सदस्य अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है और यही वजह है कि हम शिक्षा और व्यापार दोनों में संतुलन बनाए हुए हैं।
प्रश्न 5 : भविष्य के लिए आपकी क्या योजनाएँ हैं?
अनुराग जैन : हमारी कोशिश है कि आने वाले वर्षों में शिक्षा का स्तर और ऊँचा उठाएँ। साथ ही, बागपत और आसपास के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करें, ताकि यहाँ के बच्चों और युवाओं को बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े।
जैन परिवार की यह यात्रा संघर्ष से सफलता तक की मिसाल है। मसालों की दुकान से शुरू हुआ सफ़र आज शिक्षा और व्यापार की बुलंदियों तक पहुँच चुका है। समाज के लिए उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।



