बागपत

शरीरदान कर जगमोहन इंसां बने मानवता की मिसाल

नाम चर्चा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
बागपत : मानव सेवा और परोपकार की अनूठी मिसाल कायम करने वाले शरीरदानी स्वर्गीय जगमोहन इंसां की स्मृति में बुधवार को जैन औषधालय, प्रेमपुरी मुजफ्फरनगर में नाम चर्चा एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उनके परिजनों, रिश्तेदारों, डेरा सच्चा सौदा के जिम्मेदारों तथा बड़ी संख्या में साध-संगत ने भाग लेकर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए और भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
गौरतलब है कि सच्चे नम्र सेवादार सोनू इंसां के पिता जगमोहन इंसां ने 30 मई 2026 को अपनी सांसारिक यात्रा पूर्ण कर सतगुरु की गोद में सचखंड गमन किया था। उनका परिवार लंबे समय से डेरा सच्चा सौदा से जुड़ा हुआ है। पूज्य संत डॉ. एमएसजी की प्रेरणा से जगमोहन इंसां ने जीवनकाल में ही अपनी मृत्यु के बाद मेडिकल शोध एवं मानव कल्याण के लिए शरीरदान का संकल्प लिया था और इसके लिए आवश्यक प्रपत्र भी भर रखा था।
उनके निधन के बाद परिवार की सहमति से उनकी आंखें तथा पूरा शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए ग्रेटर नोएडा स्थित ईशान मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया गया। इस सेवा भावना और मानवता के प्रति समर्पण को याद करते हुए उनके नामित श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अरदास के साथ हुआ। इसके पश्चात कविराज भाइयों ने चेतावनी प्रथाओं से संबंधित शब्द प्रस्तुत किए। साथ ही पूज्य गुरु जी द्वारा रचित ग्रंथ “सचखंड की सड़क भाग-1” में वर्णित जीवन और मृत्यु के महत्व पर आधारित प्रकरण “जीना-जीना हर कोई कहंदा, मरना किसी नूं याद नहीं” की व्याख्या संगत को सुनाई गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने जीवन की क्षणभंगुरता तथा मानव सेवा के महत्व पर विचार व्यक्त किए।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि शरीरदान और नेत्रदान जैसी सेवाएं समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रही हैं। पूज्य संत डॉ. एमएसजी ने वर्षों पूर्व साध-संगत को प्रेरित करते हुए संदेश दिया था कि मृत्यु के बाद शरीर और आंखें नष्ट हो जाती हैं, जबकि इन्हें दान कर अनेक लोगों के जीवन में नई उम्मीद और रोशनी लाई जा सकती है। नेत्रदान से जहां नेत्रहीनों को दृष्टि मिलती है, वहीं शरीरदान से चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को चिकित्सा विज्ञान में नए अनुसंधान करने का अवसर प्राप्त होता है, जिससे संपूर्ण मानवता लाभान्वित होती है।
इसी प्रेरणा का परिणाम है कि अब तक डेरा सच्चा सौदा से जुड़े सैकड़ों श्रद्धालु मृत्यु के उपरांत अपने शरीर और नेत्र दान कर चुके हैं। इन दानों के माध्यम से अनेक मेडिकल संस्थानों को शोध कार्यों में सहायता मिली है, जबकि सैकड़ों दृष्टिहीन लोगों को नेत्र प्रत्यारोपण के जरिए नई रोशनी प्राप्त हुई है। इससे समाज में सेवा, परोपकार और मानवता के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई है।
स्वर्गीय जगमोहन इंसां अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में पत्नी सरोज इंसां, पुत्र सोनू इंसां एवं मोनू इंसां, पुत्रियां रितु इंसां, डोली इंसां और नीतू इंसां सहित अन्य परिजन शामिल हैं।
कार्यक्रम में डेरा सच्चा सौदा के जिम्मेदार सच्चे नम्र सेवादार रामकुमार इंसां, महेंद्र इंसां, अंजेश इंसां, राजकुमार इंसां, शेर सिंह, सच्ची नम्र सेवादारनियां बबली इंसां, सीमा इंसां, पुष्पा इंसां तथा सेवादार भाई विपिन इंसां, नीरज इंसां, बलराम इंसां, पंकज इंसां, किशोरी इंसां सहित सैकड़ों की संख्या में साध-संगत उपस्थित रही।
सभा के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने स्वर्गीय जगमोहन इंसां के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा मानवता की सेवा के उनके संकल्प को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इसके बाद उपस्थित संगत को प्रसाद वितरित किया गया। जगमोहन इंसां के सेवा, समर्पण और शरीरदान के इस प्रेरणादायी कार्य को उपस्थित लोगों ने मानवता के लिए एक अमूल्य योगदान बताया।
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