मेरठ

सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम के लिए ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ कार्यक्रम की डीआईजी ने की समीक्षा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
मेरठ। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ कार्यक्रम के अंतर्गत मेरठ परिक्षेत्र में किए गए कार्यों की समीक्षा पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) मेरठ रेंज श्री कलानिधि नैथानी ने की। इस दौरान उन्होंने दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों और क्रिटिकल कॉरिडोर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
डीआईजी ने बताया कि मेरठ रेंज में कुल 90 दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र और 22 क्रिटिकल कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं। सभी क्रिटिकल कॉरिडोर पर सीसी (क्रिटिकल कॉरिडोर) टीमों का गठन किया गया है, जिनमें प्रत्येक टीम में एक उपनिरीक्षक और चार हेड कांस्टेबल/कांस्टेबल तैनात किए गए हैं। यातायात नियंत्रण के लिए रेंज में 665 यातायात पुलिसकर्मी और 434 जनपदीय पुलिसकर्मी लगाए गए हैं।
दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अब तक 302 चेतावनी बोर्ड लगाए जा चुके हैं, जबकि 25,339 रिफ्लेक्टर पट्टियां स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही 1,020 स्थानों से अतिक्रमण हटाया गया है और हाईवे पर चढ़ने-उतरने के 81 स्थानों पर गति सीमा निर्धारित की गई है।
जनपदवार स्थिति की बात करें तो मेरठ में 27 दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र और 7 क्रिटिकल कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं। यहां 145 चेतावनी बोर्ड लगाए गए, 16,383 रिफ्लेक्टर पट्टियां लगाई गईं और 680 अतिक्रमण हटाए गए।
बुलंदशहर में 17 दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र और 6 क्रिटिकल कॉरिडोर हैं, जहां 81 चेतावनी बोर्ड और 7,023 रिफ्लेक्टर पट्टियां लगाई गई हैं।
बागपत में 25 दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र और 6 क्रिटिकल कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं, जबकि
हापुड़ में 21 दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र और 3 क्रिटिकल कॉरिडोर बनाए गए हैं।
डीआईजी ने निर्देश दिए कि सभी क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को ब्रेथ एनालाइजर, रिफ्लेक्टिंग जैकेट, ब्लिंकिंग लाइट, स्पीड रडार और बॉडी वॉर्न कैमरा जैसे अत्याधुनिक उपकरणों से लैस किया जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी रूप से कमी लाई जा सके।
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