ललितपुर
आठवें दिन भी जारी रहा प्रो.(मेजर) पंकज शर्मा का सत्याग्रह
समर्थन का दायरा और व्यापक, बर्खास्त प्राचार्य ने भी दिया धरने को समर्थन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय में पदस्थ प्रो.(मेजर) पंकज शर्मा द्वारा अपनी बहाली रोके जाने एवं 25 माह से अधिक समय से लंबित जांच के विरोध में शुरू किया गया सत्याग्रह आठवें दिन भी लगातार जारी रहा। महाविद्यालय परिसर स्थित इतिहास विभाग के बाहर शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा यह सत्याग्रह अब केवल एक व्यक्तिगत संघर्ष न रहकर, शिक्षा जगत में प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ आवाज बनता जा रहा है। सत्याग्रह के आठवें दिन प्रो.(मेजर) पंकज शर्मा ने दोहराया कि जांच को जानबूझकर लंबित रखकर उनकी नियुक्ति बहाली रोकी जा रही है, जिससे उन्हें और उनके परिवार को लंबे समय से आर्थिक व मानसिक उत्पीडऩ का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका सत्याग्रह अनवरत जारी रहेगा। इधर, सत्याग्रह को मिल रहा समर्थन लगातार व्यापक होता जा रहा है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी शिक्षक संघ के महामंत्री डा. अनिरुद्ध गोयल, पूर्व महामंत्री एवं उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा आयोग के पूर्व सदस्य डा.बृजेंद्र सिंह बौद्ध, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. ज्योति वर्मा तथा वरिष्ठ चिकित्साधिकारी हाथरस डा.मनोज कटारा पूर्व में सत्याग्रह स्थल पर पहुंचकर नैतिक समर्थन दे चुके हैं और मामले के शीघ्र समाधान की मांग कर चुकें हैं। सत्याग्रह के आठवें दिन एक अहम घटनाक्रम के तहत प्रबंध समिति द्वारा बर्खास्त किए गए नेहरू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो.राकेश नारायण द्विवेदी भी धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने अपने साथ हुए आर्थिक एवं मानसिक शोषण का उल्लेख करते हुए प्रो.(मेजर) पंकज शर्मा के संघर्ष को पूर्ण समर्थन दिया और उन्हें शीघ्र ही ससम्मान बहाल किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक शिक्षक का नहीं, बल्कि शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और न्याय का प्रश्न बन चुका है। उधर, नेहरू महाविद्यालय की प्रबंध समिति अध्यक्ष प्रदीप चौबे द्वारा पूर्व में जारी पत्र के बावजूद अब तक किसी ठोस निर्णय या जांच निष्कर्ष के सामने न आने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। महाविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों में इस प्रकरण को लेकर चर्चाएं तेज होती जा रही हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन और संबंधित जांच समिति पर टिकी हैं कि कब तक इस मामले में कोई स्पष्ट और निष्पक्ष निर्णय लिया जाता है, या फिर यह सत्याग्रह और अधिक लंबा खिंचने को मजबूर होगा। इस दौरान रमाकांत चौबे, आशीष चौबे, अरुण तिवारी, अरविन्द मुखराइयां ने भी सत्याग्रह स्थल पर पहुंच कर प्रो. (मेजर) पंकज शर्मा के सत्याग्रह को पूर्ण समर्थन दिया है।



